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इसके बावजूद नगर पालिका परिषद ने पिनाक ट्रेडिंग कंपनी खरगोन से लगभग 9 लाख 90 हजार रुपए में टंट्या मामा की मूर्ति खरीदने का निर्णय लिया। जब मूर्ति का लोकार्पण किया गया तब सामने आया कि स्थापित की गई मूर्ति न तो धातु की है और न ही पत्थर की, बल्कि वह फाइबर की मूर्ति है। कांग्रेस का आरोप है कि यह सीधे-सीधे विज्ञप्ति की शर्तों और कलेक्टर के आदेशों का उल्लंघन है।
रवि नाईक ने कहा कि मूर्ति प्राप्त करने के समय नगर पालिका द्वारा भौतिक सत्यापन किया गया होगा, ऐसे में फाइबर की मूर्ति स्वीकार करना यह दर्शाता है कि संबंधित अधिकारियों और जिम्मेदार लोगों ने जान-बूझकर इस अनियमितता को नजरअंदाज किया। यह मामला प्रथम दृष्टया आर्थिक अपराध की श्रेणी में आता है।
उन्होंने बताया कि कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने कलेक्टर महोदया से पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी गई है कि यदि दोषियों पर कार्रवाई नहीं की गई तो पार्टी सड़कों पर उतरकर आंदोलन करेगी।
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