जांच में यह तथ्य सामने आया है कि कई शासकीय स्कूलों में बिना आवश्यक तकनीकी स्वीकृति, बिना भौतिक सत्यापन और निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन किए बिना निजी फर्मों को भुगतान कर दिया गया। इन कार्यों में भवन मरम्मत, साइकिल स्टैंड और पार्किंग शेड जैसे कार्य शामिल थे, जिनकी वास्तविक स्थिति और गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।
तीन प्राचार्यों पर गिरी गाज
संयुक्त संचालक लोक शिक्षण, रीवा संभाग द्वारा जिन तीन प्राचार्यों को निलंबित किया गया है, उनके नाम इस प्रकार हैं संकर्षण प्रसाद पाण्डेय, रवीन्द्र सिंह, किरण पटेल आरोप है कि इन प्राचार्यों ने अपने-अपने विद्यालयों में 23 से 25 लाख रुपये तक के फर्जी एवं अनियमित भुगतान निजी फर्मों को किए। निलंबन के बाद तीनों को बीईओ कार्यालय, अमरपाटन से अटैच कर दिया गया है।
पहले भी हो चुकी है बड़ी कार्रवाई
इस घोटाले में यह पहली कार्रवाई नहीं है। इससे पहले भी शिक्षा विभाग द्वारा बीईओ, चार प्राचार्य और एक चपरासी के खिलाफ कार्रवाई की जा चुकी है। लगातार सामने आ रही वित्तीय अनियमितताओं के कारण विभागीय जांच को और गहरा किया गया है।
अब तक 9 कर्मचारी निलंबित
अब तक इस पूरे मामले में कुल 9 अधिकारियों और कर्मचारियों को निलंबित किया जा चुका है। इनमें विभिन्न स्कूलों के प्राचार्य, विकासखंड शिक्षा अधिकारी और अन्य संबंधित कर्मचारी शामिल हैं। शिक्षा विभाग का मानना है कि यह घोटाला केवल कुछ स्कूलों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका दायरा और भी बड़ा हो सकता है।
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जांच का दायरा बढ़ा और कार्रवाई के संकेत
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, जांच अभी प्रारंभिक चरण में है और आने वाले दिनों में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं। दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कठोर विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ वसूली की कार्रवाई भी की जा सकती है।
शिक्षा विभाग की सख्ती से हड़कंप
लगातार हो रही निलंबन की कार्रवाइयों से शिक्षा विभाग में हड़कंप की स्थिति बनी हुई है। वहीं, इस पूरे मामले को लेकर अभिभावकों और स्थानीय लोगों में भी नाराजगी देखी जा रही है, जो स्कूलों के विकास के नाम पर हुए इस कथित घोटाले पर जवाब मांग रहे हैं।
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