कमिश्नर द्वारा जारी आदेश के तहत जिन प्राचार्यों को निलंबित किया गया है, उनमें शासकीय हाईस्कूल गोविंदपुर मथुरा प्रसाद वर्मा, शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय गोरसरी गुलजार सिंह टेकाम, हायर सेकेंडरी स्कूल देवराजनगर राम लखन रावत, शासकीय विद्यालय गुलबार गुजारा शिवलाल बैस, हायर सेकेंडरी स्कूल हर्रई सियंबर सिंह, शासकीय विद्यालय देवदहा लक्ष्मण शुक्ला इसके अलावा, जिला पंचायत सीईओ शैलेन्द्र सिंह ने अलग से कार्रवाई करते हुए शासकीय हाईस्कूल देवरा मोलहाई की प्राचार्य रजनी पोरवाल को निलंबित किया है।
निलंबन की संख्या 17 तक पहुंची
इस लघु निर्माण घोटाले में अब तक कुल 16 प्राचार्य और जिम्मेदार अधिकारी निलंबित किए जा चुके हैं। यह साफ संकेत है कि प्रशासन इस मामले को हल्के में लेने के मूड में नहीं है। सूत्रों के मुताबिक आने वाले दिनों में रिकवरी, एफआईआर और विभागीय जांच का दायरा भी बढ़ सकता है।
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शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
करोड़ों रुपये के लघु निर्माण कार्यों का उद्देश्य स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं को बेहतर करना था, लेकिन अनियमितताओं के कारण यह राशि कागजों में ही खपती नजर आ रही है। इस घोटाले ने न केवल शिक्षा विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि स्थानीय स्तर पर जवाबदेही तय करने की जरूरत भी उजागर की है। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने तक कार्रवाई का सिलसिला जारी रहेगा। दोषी पाए जाने वालों से राशि की वसूली और कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।
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