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Maha Shivratri 2026: महाशिवरात्रि पर बाबा वैद्यनाथ मंदिर में पूजा करने जा रहे हैं तो पहले प्रशासन की नई व्यवस्था जरूर जान लें.नियमों की जानकारी नहीं होगी तो दर्शन के दौरान आपको परेशानी का सामना करना पड़ सकता है.
देवघर: महाशिवरात्रि का पावन पर्व भगवान भोलेनाथ को समर्पित है. यह दिन शिव भक्तों के लिए आस्था, भक्ति और उत्साह का प्रतीक माना जाता है. इस दिन देशभर के शिवालयों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है. चारों ओर हर हर महादेव के जयकारे गूंजते हैं. मान्यता है कि महाशिवरात्रि के दिन ही शिवलिंग की उत्पत्ति हुई थी. शिव पुराण के अनुसार इसी पावन तिथि पर भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह भी संपन्न हुआ था. यही कारण है कि इस दिन भगवान भोलेनाथ की पूजा विशेष विधि-विधान और पूरे उत्साह के साथ की जाती है.
इस वर्ष महाशिवरात्रि का व्रत फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि, यानी 15 फरवरी को रखा जाएगा. वैसे तो हर शिव मंदिर में इस दिन विशेष पूजा होती है, लेकिन झारखंड के देवघर में स्थित बाबा वैद्यनाथ धाम की महाशिवरात्रि का महत्व अलग ही है. यहां का उत्सव बेहद भव्य और अद्भुत होता है.महाशिवरात्रि के दिन बाबा वैद्यनाथ की पूजा पूरे नियम और परंपरा के साथ की जाती है. इसके साथ ही रात में विश्व प्रसिद्ध भव्य शिव बारात निकाली जाती है, जिसे देखने के लिए देश के कोने-कोने से श्रद्धालु देवघर पहुंचते हैं.
मंदिर की व्यवस्था में स्थायी बदलाव
देवघर अनुमंडल पदाधिकारी एवं मंदिर प्रभारी रवि कुमार ने जानकारी देते हुए कहा कि महाशिवरात्रि को लेकर देवघर जिला प्रशासन भी विशेष तैयारियां करता है. इस दिन मंदिर में वीआईपी और वीवीआईपी दर्शन पर रोक रहेगी, ताकि आम श्रद्धालुओं को सुगम दर्शन मिल सके. इस वर्ष एक दिन नहीं बल्कि दो दिन तक शीघ्रदर्शनम कूपन की व्यवस्था लागू रहेगी. जिसकी कीमत 600 रुपये रहने वाली है. इसके साथ ही मंदिर के पट तड़के 3 बजे ही खोल दिए जाएंगे, जिससे अधिक से अधिक श्रद्धालु बाबा का दर्शन कर सकें.
श्रद्धालु रात 12 बजे से ही कतार में लगना शुरू कर देते हैं. सामान्य दर्शन की कतार शिवरामझा चौक से क्यू कॉम्प्लेक्स होते हुए मंदिर तक पहुंचेगी. वहीं शीघ्रदर्शनम की अलग कतार पाठक धर्मशाला होते हुए मंदिर पहुंचेगी. प्रशासन की ओर से सुरक्षा और व्यवस्था के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो.
नहीं होगी श्रृंगार पूजा
महाशिवरात्रि के दिन एक विशेष बात यह भी है कि संध्या समय बाबा वैद्यनाथ की श्रृंगार पूजा नहीं होती है. इस दिन पूरा ध्यान रात्रि पूजा और विशेष अनुष्ठानों पर केंद्रित रहता है. कुल मिलाकर महाशिवरात्रि का यह पर्व भक्ति, आस्था और उल्लास का संगम है. देवघर में यह दिन और भी खास बन जाता है, जहां बाबा वैद्यनाथ के दर्शन और भव्य शिव बारात का अनुभव श्रद्धालुओं के जीवन में अविस्मरणीय स्मृति बन जाता है.
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मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले…और पढ़ें
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