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Mahashivratri Puja Muhurat Vidhi: महाशिवरात्रि पर किस प्रकार पूजा करें ताकि माता पार्वती और शिव का आशीर्वाद मिले, बता रहे हैं देवघर के ज्योतिषाचार्य. इसके साथ ही जानिए कि इस दिन बाबा को क्या-क्या चढ़ाना चाहिए और किस प्रहर में किस प्रकार पूजा करनी चाहिए.
देवघर. फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाने वाला पावन पर्व महाशिवरात्रि हिंदू धर्म में अत्यंत विशेष महत्व रखता है. मान्यता है कि इसी पवित्र रात्रि में भगवान शिव और माता पार्वती का दिव्य विवाह संपन्न हुआ था. यही कारण है कि इस दिन भक्त पूरे श्रद्धा और भक्ति भाव से भगवान भोलेनाथ और माता पार्वती की पूजा-अर्चना करते हैं. कहा जाता है कि महाशिवरात्रि की रात स्वयं भगवान शिव अपने गणों सहित पृथ्वी पर विचरण करते हैं और सच्चे मन से पूजा करने वाले भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं.
क्या कहते हैं देवघर के ज्योतिषाचार्य
देवघर के पागल बाबा आश्रम स्थित मुद्गल ज्योतिष केंद्र के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित नंदकिशोर मुद्गल ने लोकल 18 के संवाददाता से बातचीत करते हुए कहा कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार महाशिवरात्रि का व्रत और पूजा विशेष विधि से करने पर भगवान शिव अत्यंत प्रसन्न होते हैं.
देवघर के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित नंदकिशोर मुद्गल ने बताया कि इस दिन व्रत रखकर भगवान शिव और माता पार्वती की चार प्रहर में पूजा करनी चाहिए. साथ ही रात्रि जागरण का भी विशेष महत्व है. पूरी श्रद्धा से ‘षोडशोपचार’ विधि द्वारा पूजा करने से शिव कृपा शीघ्र प्राप्त होती है.
पूजा में इन चीजों को जरूर करें अर्पण
पूजा के दौरान दूध, दही, भांग, मधु और गन्ने के रस से भगवान शिव का अभिषेक करना अत्यंत शुभ माना गया है. विशेष रूप से प्रदोष काल में शिवलिंग पर दूध, जल और गन्ने के रस से अभिषेक अवश्य करना चाहिए. इसके साथ अधिक से अधिक बेलपत्र अर्पित करना भी पुण्यदायी होता है. मान्यता है कि बेलपत्र भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है, इसलिए श्रद्धा से अर्पित किया गया प्रत्येक बेलपत्र भक्त की मनोकामना पूरी करने में सहायक होता है.
चार प्रहर में करें पूजा
महाशिवरात्रि की पूजा चार प्रहर में की जाती है, और प्रत्येक प्रहर का अपना विशेष महत्व होता है. पहला प्रहर संध्या 6 बजकर 19 मिनट से रात 9 बजकर 26 मिनट तक रहेगा. इस समय श्रद्धापूर्वक शिवलिंग का अभिषेक कर दीप और धूप अर्पित करना चाहिए.
दूसरा प्रहर रात 9 बजकर 26 मिनट से 12 बजकर 34 मिनट तक रहेगा. इस दौरान मंत्रोच्चार के साथ पूजा करें और “ॐ नमः शिवाय” का जाप करें.
तीसरा प्रहर रात 12 बजकर 34 मिनट से भोर 3 बजकर 41 मिनट तक रहेगा, जिसे अत्यंत शुभ माना गया है. इस समय विशेष भक्ति भाव से शिव आराधना करें.
चौथा और अंतिम प्रहर भोर 3 बजकर 41 मिनट से सुबह 6 बजकर 48 मिनट तक रहेगा. इस समय अंतिम अभिषेक कर आरती और प्रार्थना के साथ व्रत का समापन करें. इस प्रकार विधिपूर्वक की गई पूजा से भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा अवश्य मिलती है और जीवन में सुख-शांति एवं समृद्धि आती है.
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बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें
Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी, राशि-धर्म और शास्त्रों के आधार पर ज्योतिषाचार्य और आचार्यों से बात करके लिखी गई है. किसी भी घटना-दुर्घटना या लाभ-हानि महज संयोग है. ज्योतिषाचार्यों की जानकारी सर्वहित में है. बताई गई किसी भी बात का Local-18 व्यक्तिगत समर्थन नहीं करता है.
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