Buffalo Transport Case: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने महासमुंद में जब्त की गई 15 भैंसों को छोड़ने का आदेश दिया है. कोर्ट ने कहा कि केवल पशु परिवहन को कत्लखाने से जोड़ना गलत है. भैंसों के मालिक छोटे किसान और डेयरी संचालक बताए गए हैं. पुलिस ने शक के आधार पर पशुओं को जब्त किया था. यह फैसला किसानों और पशुपालकों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है.
शक के आधार पर जब्त कर ली गई थीं भैंसें
पूरा मामला तब सामने आया जब पुलिस ने महासमुंद जिले में 3 मादा और 12 नर भैंसों को यह शक जताते हुए जब्त कर लिया कि उन्हें कत्लखाने ले जाया जा रहा है. पुलिस ने यह कार्रवाई छत्तीसगढ़ कृषि पशु वध प्रतिषेध अधिनियम, 2004 की धारा 6 के तहत की थी.
मालिक बोले यही हमारी रोजी-रोटी है
भैंसों के तीन कथित मालिकों ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. उन्होंने अदालत को बताया कि वे छोटे किसान और डेयरी संचालक हैं और ये भैंसें ही उनकी कमाई का एकमात्र साधन हैं. उनका कहना था कि पशुओं को खेती और डेयरी के काम के लिए ले जाया जा रहा था, न कि किसी अवैध मकसद से.
हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी
मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस संजय कुमार जैसवाल ने अहम टिप्पणी की. कोर्ट ने कहा कि अगर कृषि पशुओं का परिवहन वध के उद्देश्य से नहीं है, तो उसे अपराध नहीं माना जा सकता. कोर्ट ने यह भी जोड़ा कि भैंसों को पुलिस या गौशाला की अभिरक्षा में रखने से कोई उपयोगी उद्देश्य पूरा नहीं होता, बल्कि इससे किसानों का नुकसान होता है.
भैंसें लौटाने का आदेश
हाई कोर्ट ने जिला न्यायालय को निर्देश दिए कि भैंसों को पुलिस कस्टडी से मुक्त कर उनके मालिकों को सौंपा जाए, ताकि वे उन्हें कृषि कार्यों में उपयोग कर सकें. इस फैसले को किसानों और पशुपालकों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है.
About the Author

Shweta Singh, currently working with News18MPCG (Digital), has been crafting impactful stories in digital journalism for more than two years. From hyperlocal issues to politics, crime, astrology, and lifestyle,…और पढ़ें
Discover more from India News
Subscribe to get the latest posts sent to your email.