हिंदू कैलेंडर के अनुसार एक संवत में कुल 24 पक्ष आते हैं और एक पक्ष में एक चतुर्थी तिथि का आगमन होता है, जो भगवान शिव के पुत्र गणेश को समर्पित होती है, लेकिन माघ मास की चतुर्थी तिथि को विधि अनुसार भगवान गणेश की पूजा अर्चना स्तोत्र का पाठ और मंत्रों का जाप करने से चमत्कारी फल की प्राप्ति होती है. चलिए विस्तार से जानते हैं कि भगवान गणेश की पूजा अर्चना व्रत और किन मंत्रों का जाप करने से लाभ मिलेगा…
भगवान गणेश को समर्पित है चतुर्थी तिथि
इसकी अधिक जानकारी देते हुए हरिद्वार के धर्माचार्य पंडित श्रीधर शास्त्री बताते हैं कि एक संवत में 24 चतुर्थी तिथि का आगमन होता है. चतुर्थी तिथि भगवान शिव के पुत्र और रिद्धि सिद्धि के दाता भगवान गणेश को समर्पित है. जैसे श्रावण मास भगवान शिव की पूजा अर्चना करने के लिए सबसे उत्तम समय होता है वैसे ही माघ मास में भी भगवान शिव की पूजा अर्चना आराधना करने पर लाभ होता है.
भगवान गणेश के 12 नामों का करें जाप
भगवान शिव को समर्पित माघ मास शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि कार्यों में आ रही अड़चनें और रुके हुए कार्यों को पूरा करने के लिए होती है. इस दिन रिद्धि सिद्धि और बुद्धि के दाता भगवान गणेश के 12 नामों का जाप करने और उनके बीज मंत्र का 108 बार पवित्र मन से स्नान आदि करने पर जाप किया जाए तो सभी कार्यों में सफलता मिल जाती है.
वैदिक पंचांग के अनुसार माघ शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि 22 जनवरी की तड़के 02:28 am से शुरू होकर 23 जनवरी की तड़के 01:46 am तक रहेगी. 22 जनवरी को ही यह महाफल लायक व्रत करने पर विशेष लाभ मिलेगा.
पूजा विधि और मंत्र
माघ शुक्ल पक्ष की विनायक चतुर्थी 22 जनवरी को होगी. इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर गंगाजल से स्नान आदि करने के बाद अपने घर के देवालय या भगवान शिव, गणेश भगवान के सिद्ध पीठ मंदिर में जाकर गणेश स्तोत्र, बीज मंत्र ‘ॐ गं गणपतये नमः’ का 108 बार जाप करें साथ ही भगवान शिव के पंचाक्षर शिव तांडव रुद्राष्टक आदि स्तोत्र का पाठ भी कर सकते हैं जिससे विशेष लाभ की प्राप्ति होने की धार्मिक मान्यता है.
12 नाम वाला मंत्र
प्रथमं वक्रतुण्डं च, एकदन्तं द्वितीयकम्।
तृतीयं कृष्णपिङ्गाक्षं, गजवक्त्रं चतुर्थकम्।।
लम्बोदरं पञ्चमं च, षष्ठं विकटमेव च।
सप्तमं विघ्नराजेन्द्रं, धूम्रवर्णं तथाष्टमम्।।
नवमं भालचन्द्रं च, दशमं तु विनायकम्।
एकादशं गणपतिं, द्वादशं तु गजाननम्।।
विनायक चतुर्थी के व्रत से लाभ
भगवान गणेश रिद्धि सिद्धि बुद्धि विवेक आदि को प्रदान करते हैं. भगवान गणेश के मंत्र स्तोत्र आदि के साथ यदि भगवान शिव की पूजा अर्चना, आराधना की जाए तो साधक का जीवन देवताओं के समान हो जाता है. माघ शुक्ल पक्ष की गौरी तीज यानी गौरी तृतीया को माता पार्वती की आराधना करने से संतान की प्राप्ति होती है वैसे ही चतुर्थी को विनायक चतुर्थी का व्रत करने पर सभी रुके हुए कार्य, शत्रु बाधा, कार्यों में अड़चन आदि खत्म हो जाती है.
Discover more from India News
Subscribe to get the latest posts sent to your email.