बिहार के उपमुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा है कि भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में पारदर्शिता, संवेदनशीलता और सामाजिक न्याय सुनिश्चित करना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि मगध प्रमंडल में सामाजिक प्रभाव आकलन का दायित्व बिपार्ड, गया को सौंपे जाने से प्रभावित परिवारों और स्थानीय समुदायों की सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों का अधिक वैज्ञानिक और निष्पक्ष मूल्यांकन संभव होगा।
राज्यपाल की स्वीकृति से अधिसूचना जारी
पटना स्थित राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर एवं पारदर्शिता अधिकार अधिनियम–2013 के तहत एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। इसके तहत मगध प्रमंडल के अंतर्गत जिलों में किसी भी परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण से जुड़े मामलों में सामाजिक प्रभाव आकलन का कार्य अब बिहार प्रशासनिक सुधार प्रशिक्षण संस्थान, बिपार्ड गया द्वारा किया जाएगा। इस संबंध में जारी अधिसूचना को राज्यपाल की स्वीकृति प्राप्त है।
धारा–4 के तहत किया गया प्रावधान
अधिसूचना के अनुसार यह व्यवस्था अधिनियम की धारा–4 के प्रावधानों के अंतर्गत की गई है, ताकि भूमि अधिग्रहण से प्रभावित परिवारों और स्थानीय समुदायों पर पड़ने वाले सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय प्रभावों का समुचित और संतुलित आकलन सुनिश्चित किया जा सके। इससे भूमि अर्जन से जुड़े निर्णय अधिक न्यायसंगत और लोकहितकारी बनेंगे।
पूर्व से अधिसूचित संस्थानों के साथ बिपार्ड भी शामिल
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के प्रधान सचिव सी. के. अनिल द्वारा जारी अधिसूचना में बताया गया है कि इससे पहले एल.एन. मिश्रा आर्थिक अध्ययन एवं सामाजिक परिवर्तन संस्थान, ए.एन. सिन्हा समाज अध्ययन संस्थान, चंद्रगुप्त प्रबंधन संस्थान, आद्री तथा विकास प्रबंधन संस्थान को सामाजिक प्रभाव आकलन इकाई के रूप में अधिसूचित किया गया था। अब लोकहित में मगध प्रमंडल के लिए बिपार्ड, गया को भी इस सूची में शामिल किया गया है।
जुलाई 2025 की समीक्षा बैठक में बनी सहमति
गौरतलब है कि जुलाई 2025 में अपर मुख्य सचिव, राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की अध्यक्षता में सभी अधिसूचित एसआईए इकाइयों के साथ एक विस्तृत समीक्षा बैठक आयोजित की गई थी। इस बैठक में सामाजिक प्रभाव आकलन कार्य को मानक प्रक्रिया के तहत समयबद्ध रूप से पूरा करने, भूमि के रकबे के आधार पर एसआईए शुल्क निर्धारण, जिलावार एजेंसी आवंटन और रिपोर्ट की समय-सीमा तय करने पर सहमति बनी थी।
जिलाधिकारियों को सीधे कार्यादेश का अधिकार
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया था कि जिलाधिकारी सीधे आवंटित सामाजिक प्रभाव आकलन एजेंसी को कार्यादेश निर्गत करेंगे, जिससे भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में अनावश्यक विलंब न हो। विभाग ने स्पष्ट किया है कि बिपार्ड, गया को शामिल किए जाने के साथ पूर्व निर्धारित एसआईए एजेंसी चयन रोस्टर को आवश्यक सीमा तक संशोधित माना जाएगा और यह आदेश निर्गत होने की तिथि से प्रभावी होगा।
प्रभावित परिवारों को मिलेगा बेहतर न्याय
सरकार का मानना है कि इस निर्णय से भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी, प्रभावित परिवारों की समस्याओं और अपेक्षाओं का बेहतर आकलन संभव होगा तथा पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन से जुड़े निर्णय अधिक संवेदनशील, न्यायसंगत और व्यावहारिक बन सकेंगे।
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