रांची नगर निगम के मेयर पद के लिए इस बार कुल 11 उम्मीदवार अपनी ताकत आजमा रहे हैं। खास बात यह है कि हेमंत सोरेन सरकार में गठबंधन में शामिल दलों, राजद और कांग्रेस ने भी अपने-अपने उम्मीदवार को मैदान में उतारा है। वहीं, एनडीए की ओर से अकेली रोशनी खलखो चुनावी मैदान में हैं। भाजपा संगठन उनकी जीत सुनिश्चित कराने के लिए पूरी तरह जुटा हुआ है।
महागठबंधन में हो रही फ्रेंडली फाइट
झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) से सुजीत आनंद विजय कुजूर के पक्ष में पार्टी का पूरा प्रचार-प्रसार चल रहा है। इसके अलावा, कांग्रेस की ओर से रमा खलखो के समर्थन में मंत्री और विधायक चुनाव प्रचार में लगे हैं, जबकि राजद समर्थित प्रत्याशी सुजाता कच्छप के लिए पार्टी के कार्यकर्ता पूरी मेहनत कर रहे हैं। इससे महागठबंधन के भीतर ही ‘फ्रेंडली मैच’ की स्थिति बन गई है। वहीं, झामुमो फिलहाल बैकफुट पर जाकर चुनावी रणनीति बना रही है।
क्रिश्चियन वोटरों को एकजुट करने में जुटे झामुमो प्रत्याशी
झामुमो के प्रत्याशी सुजीत विजय आनंद कुजूर को पार्टी का सीधा समर्थन नहीं मिला है, इसलिए वे मुख्य रूप से क्रिश्चियन वोटरों को एकजुट करने में जुटे हैं।
अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित है रांची मेयर की सीट
रांची मेयर की सीट अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित है और सभी 11 उम्मीदवार अनुसूचित जनजाति से ही हैं। खतरा भांपते हुए भाजपा, कांग्रेस और राजद ने वोट बंटवारे को रोकने की रणनीति पर काम करना शुरू कर दिया है।
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27 फरवरी को आएगा नतीजा
चुनाव में कई निर्दलीय उम्मीदवार भी हिस्सा ले रहे हैं। इस चुनावी दंगल में किसकी जीत होगी, यह 27 फरवरी को होने वाले मतगणना के बाद ही स्पष्ट होगा। फिलहाल सभी प्रत्याशी पूरे जोश और उत्साह के साथ चुनावी अभियान चला रहे हैं।
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