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घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और ड्रोन कैमरों की मदद से सर्च ऑपरेशन चलाया गया। करीब दो घंटे की मशक्कत के बाद बालक का शव बरामद किया गया। घटना के बाद पूरे इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई थी और ग्रामीणों से सतर्क रहने की अपील की गई। वन मंडल अधिकारी गौरव शर्मा ने बताया कि यदि ग्रामीणों द्वारा तेंदुए की मूवमेंट की सूचना पहले दी जाती, तो संभवतः इस दर्दनाक घटना को रोका जा सकता था। उन्होंने बताया कि मृत बालक के परिजनों को शासन की ओर से 8 लाख रुपये की आर्थिक सहायता राशि प्रदान की गई है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए रेस्क्यू ऑपरेशन को तेज किया गया और जबलपुर से मंगवाया गया पिंजड़ा घटनास्थल से लगे क्षेत्र में लगाया गया, जहां सुबह करीब 9 से 10 बजे के बीच तेंदुआ पिंजरे में फंस गया। भोपाल स्थित चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन के निर्देश पर यह निर्णय लिया गया कि चूंकि तेंदुए का मानव से प्रत्यक्ष संपर्क हो चुका है और एक मानव की मौत भी हुई है, इसलिए उसे जंगल में छोड़ने के बजाय प्रदेश के मुकुंदपुर जू भेजा जाएगा। इसके लिए विशेष टीम को रवाना कर दिया गया है। वन विभाग के अनुसार पकड़ा गया तेंदुआ वयस्क है और उसकी उम्र करीब 2 वर्ष बताई जा रही है। फिलहाल क्षेत्र में वन विभाग की निगरानी जारी है और ग्रामीणों से सतर्क रहने की अपील की गई है।
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