बेहद रोचक है यह जगह
बेतला नेशनल पार्क के ठीक बगल में स्थित यह संग्रहालय पलामू टाइगर रिजर्व की जैव विविधता, वन्य जीवन और आदिवासी संस्कृति को बेहद रोचक अंदाज में प्रस्तुत करता है. यहां कदम रखते ही ऐसा महसूस होता है, मानो जंगल खुद अपनी कहानी सुना रहा हो. इस केंद्र में आपको प्रकृति और वन्य जीवों से जुड़ी ऐसी जानकारियां मिलती हैं, जो किताबों में भी आसानी से नहीं मिलतीं.
कंकाल देख रोमांचित होते हैं पर्यटक
संग्रहालय में जंगली जानवरों के कंकाल, उनके आंतरिक अंगों के मॉडल, जंगल सफारी के दृश्य और दुर्लभ वन्य प्रजातियों की जानकारी प्रदर्शित की गई है. यहां बाघ, हिरण, तेंदुआ समेत अन्य जानवरों के कंकालों को करीब से देखकर पर्यटक रोमांचित हो उठते हैं. इसके साथ ही जंगल के पारिस्थितिकी तंत्र को समझाने वाले दृश्य और चित्र भी यहां आकर्षण का केंद्र हैं.
कई राज्यों से आते हैं लोग
इस संग्रहालय की देखरेख कर रहे शिवनाथ राम बताते हैं कि यहां देश के अलग-अलग हिस्सों से पर्यटक आते हैं. झारखंड, बिहार, उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों के लोग यहां घूमने पहुंचते हैं और प्रकृति से जुड़ी नई-नई जानकारियां लेकर लौटते हैं. उन्होंने बताया कि यह केंद्र बच्चों, छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए भी बेहद उपयोगी है.
मशीन में पक्षियों की आवाज
यहां का एक बड़ा आकर्षण लाइब्रेरी है, जहां पर्यटक बैठकर वन, वन्य जीव और पर्यावरण से जुड़ी किताबें पढ़ सकते हैं. वहीं एक विशेष मशीन में बेतला जंगल में पाए जाने वाले पक्षियों की आवाजों का संग्रह किया गया है. बटन दबाते ही अलग-अलग पक्षियों की मधुर आवाजें सुनाई देती हैं, जो पर्यटकों को जंगल के और करीब ले जाती हैं.
इतना लगेगा शुल्क
इसके अलावा संग्रहालय में आदिवासी संस्कृति को भी खूबसूरती से दर्शाया गया है, जहां उनके रहन-सहन, कला और जीवनशैली की झलक देखने को मिलती है. संग्रहालय में प्रवेश शुल्क मात्र 20 रुपये प्रति व्यक्ति है. यह केंद्र सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक खुला रहता है. अगली बार इधर का रुख करें तो यह जगह जरूर घूमें. यकीन मानिए ऐसे अनुभव आपको कहीं और नहीं मिलेंगे.
Discover more from India News
Subscribe to get the latest posts sent to your email.