कम उम्र में नौकरी के बाद प्राचार्य ने सौंपा था एनसीसी सीटीओ का कमान
विशेष बातचीत के दौरान लेफ्टिनेंट राधिका ने बताया कि सीएच स्कूल में बतौर विज्ञान शिक्षिका योगदान देने के दौरान, योग्यता और आयु के आधार पर वर्ष 2019 में उन्हें प्राचार्य द्वारा एनसीसी केयर टेकर ऑफिसर (सीनियर विंग) की जिम्मेदारी सौंपी गई थी. उस समय उनकी उम्र सबसे कम थी, लेकिन जिम्मेदारियों को उन्होंने पूरे समर्पण और अनुशासन के साथ निभाया. उन्होंने बताया कि केयर टेकर ऑफिसर के रूप में वे एनसीसी कैडेट्स को हेल्थ एंड हाइजीन, जनरल अवेयरनेस, सामाजिक जिम्मेदारियों और अनुशासन के प्रति जागरूक करती थीं.
उनका उद्देश्य केवल पाठ्यक्रम तक सीमित न रहकर कैडेट्स में नेतृत्व क्षमता, आत्मविश्वास और देश सेवा की भावना विकसित करना था. प्रशिक्षण से लौटने के बाद अब उन्हें सिलेबस के अनुसार एनसीसी का संपूर्ण और व्यावहारिक प्रशिक्षण देने की जिम्मेदारी सौंपी गई है.
डिफेंस सेवा में जाने से पहले एनसीसी ज्वाइन करना महत्वपूर्ण
लेफ्टिनेंट राधिका ने कहा कि जो छात्र-छात्राएं अपने भविष्य को डिफेंस सेवा के रूप में देखते हैं, उन्हें स्कूली शिक्षा के दौरान ही एनसीसी जरूर ज्वाइन करना चाहिए. एनसीसी की ट्रेनिंग के दौरान कैडेट्स को डिफेंस क्षेत्र की जीवनशैली, अनुशासन, समय प्रबंधन और नेतृत्व की बुनियादी समझ मिलती है, जिससे आगे चलकर सेना, नौसेना या वायुसेना में जाने में काफी सहूलियत होती है.
उनके मार्गदर्शन में कैडेट्स को राइफल हैंडलिंग, ड्रिल की प्रैक्टिस, परेड, अनुशासन और टीमवर्क का प्रशिक्षण दिया जाता है. उन्होंने कहा कि एनसीसी केवल एक गतिविधि नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने का माध्यम है.
लड़कियों को आगे बढ़ाने की मिलेगी प्रेरणा
लेफ्टिनेंट राधिका ने बताया कि एनसीसी में लेफ्टिनेंट का पद प्राप्त करने के बाद उनका अगला लक्ष्य कैप्टन और फिर मेजर के पद तक पहुंचना है. इसके लिए वे लगातार मेहनत, अनुशासन और प्रशिक्षण पर ध्यान केंद्रित करेंगी. उन्होंने कहा कि एक महिला का एनसीसी में इतने बड़े उच्च पद तक पहुंचना न केवल उनके लिए, बल्कि जिले की सभी महिला कैडेट्स के लिए प्रेरणा का स्रोत है. इससे लड़कियों में आत्मविश्वास बढ़ेगा और वे भी बड़े सपने देखते हुए एनसीसी और डिफेंस क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित होंगी.
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