कोडरमा में जिला विधिक सेवा प्राधिकार के माध्यम से आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को निःशुल्क कानूनी सहायता प्रदान की जा रही है. डिफेंस काउंसिल अधिवक्ता अरुण कुमार ओझा के अनुसार तीन लाख रुपये या कम वार्षिक आय वाले पात्र हैं. महिलाएं और दिव्यांग बिना आय शर्त के लाभ ले सकते हैं। जेल में बंद व्यक्ति भी आवेदन कर सकते हैं.
पैसे के अभाव में न्याय से कोई नहीं रह सकता वंचित
जिला विधिक सेवा प्राधिकार के डिफेंस काउंसिल अधिवक्ता अरुण कुमार ओझा ने इस संबंध में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि ऐसे व्यक्ति जिनकी वार्षिक आय तीन लाख रुपये या उससे कम है उन्हें डालसा की ओर से निःशुल्क अधिवक्ता मुहैया कराया जाता है. इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी व्यक्ति केवल पैसों के अभाव में न्याय से वंचित न रहे. उन्होंने बताया कि इस सुविधा का लाभ लेने के लिए संबंधित व्यक्ति को जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव के नाम एक साधारण आवेदन देना होता है. आवेदन मिलते ही डालसा द्वारा त्वरित कार्रवाई करते हुए निःशुल्क अधिवक्ता उपलब्ध करा दिया जाता है. यह प्रक्रिया सरल और आम नागरिकों के लिए सुगम बनाई गई है ताकि जरूरतमंद लोग बिना किसी झिझक के इसका लाभ उठा सकें.
महिलाओं और दिव्यांग को बिना किसी पात्रता की मिलती है सुविधा
अधिवक्ता अरुण कुमार ओझा ने बताया कि यदि कोई व्यक्ति जेल में बंद है तो वह जेल से ही जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव के नाम आवेदन देकर इस सुविधा का लाभ ले सकता है. जेल प्रशासन के जरिए आवेदन आगे भेजा जाता है और पात्रता के आधार पर निःशुल्क वकील की व्यवस्था कर दी जाती है. महिलाओं और दिव्यांगों के लिए यह सुविधा और भी व्यापक है. उन्होंने स्पष्ट किया कि महिलाओं के मामले में किसी भी प्रकार की आर्थिक पात्रता की शर्त लागू नहीं होती. यानी महिला की आय चाहे कितनी भी हो, उसे निःशुल्क कानूनी सहायता प्रदान की जाती है. इसी तरह दिव्यांग व्यक्तियों के लिए भी आय संबंधी कोई नियम या शर्त नहीं है.
छोटे मामले में खुद पैरवी करना ठीक, लेकिन बड़े मामलों में नुकसानदेह
उन्होंने बताया कि भारतीय न्याय व्यवस्था में लोगों को अपने मामले में स्वयं पैरवी करने का अधिकार भी प्राप्त है. इसके लिए व्यक्ति को प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश के समक्ष आवेदन देना होता है. न्यायाधीश की अनुमति मिलने के बाद व्यक्ति अपने केस की पैरवी स्वयं कर सकता है. हालांकि, उन्होंने यह भी आगाह किया कि छोटे और साधारण मामलों में स्वयं पैरवी करना ठीक हो सकता है, लेकिन जटिल और गंभीर मामलों में कानूनी जानकारी के अभाव में यह नुकसानदेह साबित हो सकता है. ऐसे मामलों में अनुभवी अधिवक्ता की सहायता लेना ही बेहतर होता है.
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