मन से विजय पाना जरूरी
उन्होंने बताया कि बीमारी को हराने की नहीं, बल्कि जीतने की मंशा होनी चाहिए. उनका कहना है कि जब आप किसी को हराने की सोचते हैं, तो ध्यान उसकी कमजोरी पर जाता है, लेकिन जब आप जीतने की सोचते हैं, तो आपको अपनी ताकत पर भरोसा होता है. उनके अनुसार दवाइयां और डॉक्टर की सलाह जरूरी हैं, लेकिन जब तक मन से बीमारी पर विजय नहीं पाई जाती, तब तक पूरी तरह स्वस्थ होना मुश्किल है.
डरेंगे तो हमलावर पशु की तरह नोच डालेगा कैंसर
डॉ. अरुण मिश्रा ने बताया कि कैंसर का नाम सुनते ही उन्हें भी अपनी मृत्यु निश्चित नजर आने लगी थी. लेकिन उसी क्षण उन्होंने यह निर्णय लिया कि यदि डरेंगे, तो कैंसर हमलावर पशु की तरह उन्हें नोच डालेगा. उन्होंने अपने मन को मजबूत किया और तय किया कि इस बार कैंसर से हार नहीं, जीत की तैयारी होगी. यही सोच उनकी सबसे बड़ी ताकत बनी. 39 कीमोथेरेपी सत्र, रेडियोथेरेपी और हार्मोनल थेरेपी के लंबे और कठिन इलाज के बाद आज डॉ. अरुण मिश्रा पूरी तरह स्वस्थ हैं.
उनका रिकवरी रेट इतना तेज रहा कि चिकित्सक भी आश्चर्यचकित रह गए. एम्स, नई दिल्ली में इलाज के दौरान डॉक्टरों की टीम ने उनकी दिनचर्या, सोच और जीवनशैली से जुड़े करीब 60 सवालों के जवाब लिए, ताकि यह समझा जा सके कि कम समय में इतनी अच्छी रिकवरी कैसे संभव हुई. अब उनके शरीर और उपचार प्रक्रिया पर आगे रिसर्च की तैयारी है, जिससे अन्य कैंसर मरीजों को भी लाभ मिल सके.
आज डॉ. अरुण मिश्रा कोडरमा जिले में कैंसर मरीजों के लिए संकट मोचन की तरह माने जाते हैं. उन्होंने अपनी पीड़ा को ताकत में बदला और 100 से अधिक लोगों को जीवन जीने की नई राह दिखाई. मरीजों को सकारात्मक सोच देने के उद्देश्य से उन्होंने ‘थैंक्यू कैंसर’ नामक पुस्तक लिखी, जिसका दूसरा संस्करण वर्ष 2023 में झारखंड के राज्यपाल द्वारा विमोचित किया गया.
रिसर्च के लिए अपना शरीर किया दान
डॉ. मिश्रा आज भी अपना अधिकांश समय शिक्षण संस्थानों में मोटिवेशनल स्पीकर के रूप में और अपने घर के बगीचे में लगे फूलों और हरियाली के बीच बिताते हैं. उन्होंने युवाओं में बढ़ते कैंसर मामलों पर चिंता जताते हुए बताया कि देश में करीब 50 प्रतिशत कैंसर के मामले माउथ कैंसर के होते हैं, जिनका मुख्य कारण तंबाकू, सिगरेट, बीड़ी और पान मसाला का सेवन है.
उन्होंने युवाओं से इनसे दूर रहने, नियमित मॉर्निंग वॉक और व्यायाम को दिनचर्या में शामिल करने की अपील की. कभी अंगदान की इच्छा रखने वाले डॉ. अरुण मिश्रा ने अब कैंसर रिसर्च के लिए मृत्यु के उपरांत अपना पूरा शरीर मेडिकल रिसर्च संस्थान को दान करने का संकल्प लिया है.
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