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Ancient Karmanghat Hanuman Temple Hyderabad: हैदराबाद के चम्पापेट स्थित कर्मनघाट हनुमान मंदिर में इतिहास और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिलता है. करीब 800 साल पुराने इस मंदिर का निर्माण काकतीय वंश के राजा प्रोला द्वितीय ने कराया था. मंदिर से जुड़ी कथा मुगल बादशाह औरंगजेब के समय की बताई जाती है, जब चमत्कारिक घटना के बाद मंदिर नहीं तोड़ा जा सका और इसका नाम कर्मनघाट पड़ा. यहां मंडल अनुष्ठान से बीमारियों में राहत का विश्वास है. हर मंगलवार और शनिवार को हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं.
हैदराबाद. 21वीं सदी के आधुनिक हैदराबाद की ऊंची इमारतों और भागदौड़ भरी जिंदगी के बीच एक ऐसा ऐतिहासिक और आध्यात्मिक स्थल मौजूद है, जहां आस्था और इतिहास का अद्भुत संगम देखने को मिलता है. चम्पापेट के पास स्थित कर्मनघाट हनुमान मंदिर न केवल शहर के सबसे पुराने मंदिरों में से एक है, बल्कि इसके नामकरण और स्थापना से जुड़ी कथा किसी रोमांचक कहानी से कम नहीं लगती.
इतिहासकारों के अनुसार, यह मंदिर करीब 800 साल पुराना है और इसका संबंध काकतीय वंश से जुड़ा हुआ है. 12वीं शताब्दी में काकतीय वंश के राजा प्रोला द्वितीय ने इस मंदिर का निर्माण कराया था. मंदिर में भगवान हनुमान ध्यान मुद्रा में विराजमान हैं, जिन्हें यहां अंजनेय स्वामी के रूप में पूजा जाता है. सामान्यतः हनुमान जी को वीर और पराक्रमी मुद्रा में देखा जाता है, लेकिन इस मंदिर में उनकी शांत और ध्यानमग्न छवि श्रद्धालुओं को विशेष आध्यात्मिक अनुभूति प्रदान करती है.
मुगल बादशाह औरंगजेब से जुड़ी है प्रचलित कथा
इस वजह से नाम पड़ गया कर्मनघाट
कहा जाता है कि उसी समय एक आकाशवाणी हुई, जिसमें कहा गया, मंदिर तोड़ना है राजन तो कर मन घाट, यानी हे राजा, अगर मंदिर तोड़ना है तो पहले अपने मन को कठोर और मजबूत कर. इस चमत्कारिक घटना से औरंगजेब इतना भयभीत हो गया कि वह अपनी सेना के साथ वहां से लौट गया. उसी दिन से इस स्थान का नाम कर्मनघाट पड़ गया, जिसका अर्थ है मन को कठोर बनाना.
मंडल अनुष्ठान करने पर बीमारियों से मिलती है मुक्ति
कर्मनघाट हनुमान मंदिर से जुड़ा एक और दिलचस्प पहलू यह है कि यहां बड़ी संख्या में ऐसे श्रद्धालु आते हैं, जो पुरानी बीमारियों, विशेषकर मधुमेह और मानसिक रोगों से मुक्ति की प्रार्थना करते हैं. भक्तों का विश्वास है कि यहां 40 दिनों का मंडल अनुष्ठान करने से स्वास्थ्य में सुधार होता है. हालांकि इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है, लेकिन लोगों की आस्था इसे एक विशेष ऊर्जा केंद्र मानती है.
मंदिर में उमड़ती है श्रद्धालुओं की भीड़
कर्मनघाट हनुमान मंदिर में हर मंगलवार और शनिवार को मंदिर में हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है. दूर-दूर से लोग यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं. आधुनिकता और विज्ञान के इस युग में भी कर्मनघाट हनुमान मंदिर आस्था, विश्वास और उम्मीद की एक मजबूत मिसाल बना हुआ है, जो लोगों को आध्यात्मिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है.
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दीप रंजन सिंह 2016 से मीडिया में जुड़े हुए हैं. हिंदुस्तान, दैनिक भास्कर, ईटीवी भारत और डेलीहंट में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. 2022 से News18 हिंदी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. एजुकेशन, कृषि, राजनीति, खेल, लाइफस्ट…और पढ़ें
Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी, राशि-धर्म और शास्त्रों के आधार पर ज्योतिषाचार्य और आचार्यों से बात करके लिखी गई है. किसी भी घटना-दुर्घटना या लाभ-हानि महज संयोग है. ज्योतिषाचार्यों की जानकारी सर्वहित में है. बताई गई किसी भी बात का Local-18 व्यक्तिगत समर्थन नहीं करता है.
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