हिमाचल प्रदेश के कैबिनेट मंत्री यादविंद्र गोमा ने प्रशासनिक अनुशासन को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। सोमवार को धर्मशाला में जिला योजना, विकास एवं 20 सूत्रीय कार्यक्रम समीक्षा समिति की बैठक में अनुपस्थित रहने वाले अधिकारियों को ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी करने के निर्देश दिए गए। आयुष एवं खेल मंत्री यादविंद्र गोमा ने स्पष्ट किया कि बैठक से गैरहाजिर रहने वाले सभी अधिकारियों को नोटिस भेजा जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि बीमारी का हवाला देने वाले अधिकारियों को अपना मेडिकल सर्टिफिकेट प्रस्तुत करना होगा। राजनीतिक गलियारों में इसे नौकरशाही पर नकेल कसने की एक बड़ी पहल के रूप में देखा जा रहा है। मंत्री गोमा ने जोर देकर कहा कि विकास कार्यों में धीमी गति और केवल कागजी खानापूर्ति अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मंडी डीसी को भी दिया जा चुका नोटिस मंत्री गोमा का यह सख्त रवैया हाल ही में मंडी में हुई एक घटना से भी जुड़ा है। उन्होंने मंडी के उपायुक्त (DC) अपूर्व देवगन के खिलाफ विधानसभा में विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया था, जिससे प्रशासनिक हलकों में हलचल मच गई थी। यह मामला 25 जनवरी 2026 को गणतंत्र दिवस समारोह के लिए मंडी पहुंचने पर प्रोटोकॉल के उल्लंघन से संबंधित था। आरोप था कि मंत्री के आगमन पर न तो DC मौजूद थे और न ही कोई आधिकारिक कम्युनिकेशन किया गया था। मंत्री बोले- लापरवाही बर्दाश्त नहीं कांगड़ा की बैठक में उनकी सख्ती को इसी कड़ी से जोड़कर देखा जा रहा है। मंत्री ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि चाहे जिले का उपायुक्त हो या विभाग का कोई छोटा अधिकारी, प्रोटोकॉल और जनहित के कार्यों में किसी भी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मंत्री ने अधिकारियों को जवाबदेही तय करने, 20 सूत्रीय कार्यक्रमों की प्रगति रिपोर्ट केवल फाइलों में नहीं बल्कि धरातल पर दिखाने और अनुशासन को सर्वोपरि रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रोटोकॉल और विभागीय बैठकों को हल्के में लेने वाले अधिकारी अपनी कार्यप्रणाली में सुधार करें।
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