Supreme Court News: हिमाचल प्रदेश की रहने वाली एक महिला ने अपने ही पति के हाथों मिले चाकू के ज़ख्म और अपने तीन साल के बेटे को छत से गिरते देखने के बाद भी उसे जेल की सलाखों के पीछे जाने से बचाने का फैसला किया. इस महिला ने कानून से पहले रिश्ते और परिवार को चुना. सुप्रीम कोर्ट ने महिला की गुहार मान ली और पति को बस सख्त चेतावनी देते हुए छोड़ दिया.
आरोपी पति ने पत्नी पर चाकू से हमला किया था और उनके तीन वर्षीय बेटे को पहली मंज़िल से नीचे फेंक दिया था, जिससे बच्चा गंभीर रूप से घायल हो गया. इस घटना के बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ हत्या के प्रयास सहित भारतीय दंड संहिता की गंभीर धाराओं में चार्जशीट दाखिल की. पत्नी ने भी तलाक की अर्जी देते हुए गुज़ारा भत्ता की मांग की थी.
हालांकि, जेल जाने की आशंका के चलते आरोपी ने पत्नी से संपर्क किया, अपने किए पर पछतावा जताया और रिश्ते को बचाने की अपील की. परिवार के बुजुर्गों के दखल के बाद दोनों के बीच समझौता हो गया, जिसके बाद पत्नी ने तलाक की अर्जी वापस ले ली. इसके बाद पति ने हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट में यह कहते हुए याचिका दायर की कि अब वे दोनों शांति से साथ रह रहे हैं, इसलिए आपराधिक आरोप रद्द किए जाएं. हालांकि हाई कोर्ट ने अपराध को गंभीर बताते हुए आरोप रद्द करने से इनकार कर दिया.
इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा. आरोपी की ओर से वकील सुकुमार पट्टाजोशी ने जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस एस.सी. शर्मा की बेंच के समक्ष दलील दी कि दंपति की शादी 2020 में हुई थी और अब वे अपने वैवाहिक जीवन को एक और मौका देना चाहते हैं. उन्होंने कहा कि समझौता परिवार के बुजुर्गों की मध्यस्थता से हुआ है और परिवार की भलाई को ध्यान में रखा जाना चाहिए.
राज्य सरकार ने इस याचिका का विरोध किया, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अपराध निस्संदेह गंभीर है, फिर भी दंपति की इच्छा और परिवार के हितों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. अदालत ने टिप्पणी की कि पति को जेल भेजना इस परिवार के हित में नहीं होगा. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी को कड़ी चेतावनी दी. अदालत ने उससे लिखित आश्वासन मांगा कि वह पत्नी और बच्चे का पूरा ध्यान रखेगा और उनकी सुरक्षा व हितों के खिलाफ कोई कदम नहीं उठाएगा.
अदालत ने स्पष्ट कहा कि अगर उसने दोबारा कोई हिंसक हरकत की, तो उसे तुरंत जेल भेज दिया जाएगा और सुप्रीम कोर्ट द्वारा जेल भेजे जाने की स्थिति में देश की कोई भी अदालत उसे ज़मानत नहीं देगी. अदालत ने यह भी साफ किया कि वह इस मामले में आरोप केवल इसके विशिष्ट और असाधारण तथ्यों व परिस्थितियों को देखते हुए रद्द कर रही है.
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An accomplished digital Journalist with more than 13 years of experience in Journalism. Done Post Graduate in Journalism from Indian Institute of Mass Comunication, Delhi. After Working with PTI, NDTV and Aaj T…और पढ़ें
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