दिल्ली-एनसीआर में धुंध छाने के साथ हवा जहरीली हो गई है। लोग का मानना है कि प्रदूषण सिर्फ सांस और दिल को नुकसान पहुंचाता है, लेकिन अब डॉक्टरों ने इसे हड्डियों और जोड़ों के लिए भी खतरा बताया है। प्रदूषण में मौजूद पीएम 2.5 हड्डियों और जोड़ों को भी कमजोर कर रही है।
ऐसे में अस्पतालों में इन दिनों जोड़ों के दर्द के मरीजों की संख्या पहले से बढ़ गई है। खासकर वे लोग जो पहले से गठिया (अर्थराइटिस) के मरीज हैं, उनका दर्द इतना बढ़ गया है कि दवा की मात्रा भी बढ़ानी पड़ रही है।
डॉक्टरों का कहना है कि हवा में मौजूद पीएम 2.5 मात्र छोटे कण ही नहीं है, वो बेहद जहरीले कण भी हैं, जो फेफड़ों से होते हुए खून में घुस जाते हैं। इससे पूरे शरीर में सूजन बढ़ने के साथ जोड़ों तक पहुंचकर दर्द और जकड़न बढ़ा देती है।
डॉक्टरों का कहना है कि ठंड के मौसम में मांसपेशियां सिकुड़ती हैं और खून का बहाव कम हो जाता है, ऊपर से प्रदूषण का असर। दोनों मिलकर गठिया के मरीजों के लिए मुश्किल पैदा कर रहे हैं। आर्थोपेडिक विभाग के डॉ. अरविंद मेहरा बताते हैं, पिछले दो महीनों में जोड़ों के दर्द के मरीज बहुत बढ़ गए हैं। बुजुर्गों और पहले से गठिया वाले लोगों में यह ज्यादा देखा जा रहा है।
पीएम 2.5 के संपर्क से 12-18 प्रतिशत बढ़ रहा गठिया होने का खतरा
यूरोपीय मेडिकल जर्नल में 2025 में प्रकाशित एक स्टडी के अनुसार, लंबे समय तक पीएम 2.5 के संपर्क में रहने से गठिया होने का खतरा 12 से 18 प्रतिशत तक बढ़ जाता है। आरएमएल अस्पताल के एक डॉक्टर ने बताया कि दिल्ली जैसे प्रदूषित शहरों में यह समस्या और गंभीर है। जिन लोगों को पहले कभी गठिया नहीं था, उन्हें भी अब जोड़ों में दर्द शुरू हो रहा है।
उन्होंने बताया कि प्रदूषण से शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और सूजन बढ़ती है, जो जोड़ों के टिश्यू को प्रभावित कर सकती है। ऐसे में बुजुर्गों, गठिया के मरीजों और कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों में इसका असर ज्यादा देखा जाता है। उन्होंने बचाव के लिए साफ हवा में रहने, हल्का व्यायाम, पानी ज्यादा पीना और प्रदूषण के दिनों में बाहर निकलते समय सावधानी रखने की सलाह दी है।
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