Guava gardening tips : घर की बगिया और छत पर गार्डनिंग के शौकीनों के बीच जापानी रेड डायमंड अमरूद तेजी से लोकप्रिय हो रहा है. गार्डनिंग एक्सपर्ट हेमलाल पटेल के अनुसार यह ग्राफ्टेड किस्म कम बीज, गुलाबी गूदे और बेहतरीन स्वाद के लिए जानी जाती है. इसे 22 – 24 इंच के गमले में गोबर व ऑर्गेनिक खाद के साथ लगाया जा सकता है.
बाहर से चमकदार और आकार में सुंदर
गार्डनिंग एक्सपर्ट हेमलाल पटेल ने बताया कि जापानी रेड डायमंड अमरूद एक विशेष किस्म है, जिसमें केवल 2 से 4 बीज ही पाए जाते हैं. इस अमरूद का अंदरूनी रंग गुलाबी होता है, जो देखने में बेहद आकर्षक लगता है. बाहर से चमकदार और आकार में सुंदर यह फल स्वाद में भी बेहतरीन होता है, जिसके कारण बाजार में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है.
24 इंच के मजबूत गमले का चयन करना जरूरी
एक्सपर्ट हेमलाल पटेल के अनुसार यह अमरूद टेरिस, छत, आंगन या गमले में भी आसानी से लगाया जा सकता है. गमले में लगाने के लिए 22 से 24 इंच के मजबूत गमले का चयन करना जरूरी होता है. गमले की मिट्टी उपजाऊ होनी चाहिए, जिसके लिए सामान्य मिट्टी में गोबर खाद और ऑर्गेनिक खाद को अच्छी तरह मिलाकर उपयोग करना चाहिए. इससे पौधे की बढ़वार तेज होती है और फलन भी बेहतर होता है.
यह पौधा ग्राफ्टेड होता है, इसलिए इसकी देखरेख में विशेष सावधानी जरूरी है. हेमलाल पटेल ने बताया कि ग्राफ्टेड पौधों के नीचे से निकलने वाले जंगली या अनचाहे पौधों को समय रहते हटा देना चाहिए, अन्यथा वे मुख्य पौधे की ग्रोथ और फलन को प्रभावित कर सकते हैं. सही देखभाल के साथ इसकी बढ़वार बहुत अच्छी होती है.
गमले के नीचे पर्याप्त छेद करना जरूरी
पानी प्रबंधन को लेकर उन्होंने बताया कि गमले में पानी का जमाव नहीं होना चाहिए. इसके लिए गमले के नीचे पर्याप्त छेद करना जरूरी है, ताकि अतिरिक्त पानी बाहर निकल सके. अधिक पानी रुकने से जड़ों में सड़न की समस्या हो सकती है. जापानी रेड डायमंड अमरूद की एक बड़ी खासियत यह है कि महज डेढ़ साल के भीतर इसमें अच्छे फल आने लगते हैं.
पौधे की उम्र और साइज के अनुसार इसकी कीमत 150 से 700 रुपये तक होती है, जो गार्डनिंग शौकीनों के लिए एक किफायती विकल्प माना जा रहा है. यह किस्म न सिर्फ घर की शोभा बढ़ाती है, बल्कि शौकिया स्तर पर उगाने वालों के लिए स्वादिष्ट और पौष्टिक फल भी उपलब्ध कराती है. आने वाले समय में जापानी रेड डायमंड अमरूद शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में गार्डनिंग का नया ट्रेंड बन सकता है.
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7 वर्षों से पत्रकारिता में अग्रसर. इलाहबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स इन जर्नालिस्म की पढ़ाई. अमर उजाला, दैनिक जागरण और सहारा समय संस्थान में बतौर रिपोर्टर, उपसंपादक औऱ ब्यूरो चीफ दायित्व का अनुभव. खेल, कला-साह…और पढ़ें
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