Nag Leela Festival: जांजगीर चांपा जिले में पुरानी परंपरा को एक बार फिर से जीवंत करने का प्रयास किया गया और जिला मुख्यालय मे स्थानीय युवाओं ने मिल कर तीन दिवसीय नाग लीला की शुरुआत की.
पहले जब ग्रामीण अंचल में मनोरंजन के संसाधन नहीं होते थे तब धार्मिक कार्य में ज्यादा समय बिताते थे, बड़े गांव में खास अलग मौसम में अलग-अलग तरह की गीत संगीत और सांस्कृतिक, धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता था. वहीं, धान के फसल कटाई के बाद किसान अपने परिवार के साथ शाम को नाग लीला का आनंद लेने जाते थे और मड़ई मेला में खरीदी करते थे, जांजगीर के भी 30 से 35 वर्ष पहले बुजुर्गो द्वारा इसी तरह का आयोजन किया जाता था, लेकिन वक्त के साथ-साथ लोगों का मनोरंजन का संसाधन बदलने लगा और अब बच्चों के हाथों में मोबाइल जैसे संसाधन आ गए है और मोबाइल बच्चों के इस लत को दूर करने के लिए माता पिता अब डॉक्टर और मनोवैज्ञानिक के पास जा रहे है, ऐसे में पुरानी परंपरा को शुरुआत कर बच्चों को पुरानी संस्कृति को रु ब रु कराने के लिए एक पहल की गई है, जिसे देखने के लिए सभी वर्ग के लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी.
क्या होता है नाग लीला
नागलीला में भगवान कृष्ण द्वारा बाल्य काल में यमुना नदी में कालिया नाग के आतंक को समाप्त कर विष धर के विष समाप्त करने के लिए किया गया लीला को ही नाग लीला महोत्सव के रूप में मनाया जाता है. नाग लीला करने के लिए सबसे पहले एक तालाब का चयन किया जाता है, और उसमें ड्रम को रस्से से बांध कर एक मंच और नाव बनाया जाता है, जिसमें आकर्षक सजावट किया जाता है और उसी ड्रम में गायन और नृत्य मंडली के साथ भगवान कृष्ण और कालिया नाग बनाया जाता है, फिर कृष्ण भगवान को कालिया नाग के पास बैठा कर आतिशबाजी और नृत्य के साथ तालाब के चारों ओर घुमाया जाता है और उस अनूठे नजारे को देखने की लिए लोगों की भीड़ आज भी उमड़ती है.
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