साकची बाजार के ज्वेलरी कारोबारी सुनील सिंघानिया का कहना है कि टैरिफ कम होने से कपड़ा और ज्वेलरी सेक्टर को सीधा फायदा मिल सकता है. ‘काफी समय से बाजार सुस्त पड़ा है. अगर आयात सस्ता होता है तो माल की लागत घटेगी और ग्राहक को भी राहत मिलेगी. इससे बिक्री में रफ्तार आ सकती है,’ वे उम्मीद जताते हैं.
अमेरिका के साथ रिश्ते हो रहे मजबूत
वहीं बिष्टुपुर के व्यापारी विनय अग्रवाल इसे भारत की कूटनीतिक सफलता मानते हैं. उनका कहना है, ‘यह व्यापारी वर्ग के लिए खुशी की बात है. दोनों देशों के बेहतर संबंधों का ही नतीजा है कि टैरिफ घटाया गया. अगर भविष्य में और कटौती होती है तो इसका फायदा सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचेगा.’
योगेश कुमार, जो इलेक्ट्रॉनिक्स लाइन से जुड़े हैं, मानते हैं कि भले ही हर सेक्टर को सीधा फायदा न मिले, लेकिन असर व्यापक होगा. ‘इंपोर्ट-एक्सपोर्ट ड्यूटी कम होने का मतलब है कि सप्लाई चेन की लागत घटेगी. इसका थोड़ा-थोड़ा फायदा हर वर्ग को मिलेगा, चाहे वह व्यापारी हो या ग्राहक,’ वे समझाते हैं.
काशीडीह के युवा उद्यमी उमेश गुप्ता इसे आने वाले समय के लिए संकेत मानते हैं. ‘7% की कटौती छोटी नहीं होती. यह दिखाता है कि रिश्ते मजबूत हो रहे हैं. अगर आगे टैरिफ और कम या खत्म होता है, तो भारतीय बाजारों के लिए बड़ा बूस्ट होगा.’
यह फैसला बाजार में फूंकेगा जान
कॉस्मेटिक और मनिहारी सामान के व्यापारी विकास साव बताते हैं कि बाजार की हालत फिलहाल कमजोर है, खासकर शादी सीजन से पहले. ‘ग्राहक खरीदारी टाल रहे हैं. ऐसे में अगर लागत कम होती है तो दाम नियंत्रित रहेंगे और लोगों का रुझान बाजार की तरफ बढ़ेगा. यह खबर उम्मीद की किरण जैसी है,’
कुल मिलाकर, जमशेदपुर के व्यापारियों और आम लोगों में यह भावना साफ दिखी कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लिया गया यह फैसला स्थानीय बाजारों में नई जान फूंक सकता है. मंदी से जूझ रहे कारोबारियों को अब उम्मीद है कि आने वाले महीनों में बाजार फिर से गुलजार हो सकता है.
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