किसान तय करता है दाम
इस बाजार में जमशेदपुर के आसपास के ग्रामीण इलाकों—पटमदा, बोड़ाम, हाता, हल्दीपोखर, सिनी, सरायकेला और राजखरसावां—से किसान खुद अपने खेतों में उगाई ताजी सब्जियां लेकर पहुंचते हैं. वे अपनी मेहनत की उपज सीधे जमीन पर बोरे या टोकरी में सजाकर बेचते हैं और अपनी मर्जी के अनुसार कीमत तय करते हैं. इसी वजह से किसानों को सही दाम मिलता है और ग्राहकों को बाजार से कहीं सस्ती दर पर बिलकुल ताजी सब्जियां मिल जाती हैं.
छोटे-बड़े हर तरह के दुकानदार
यहां थोक और खुदरा, दोनों तरह की खरीद-फरोख्त होती है. छोटे दुकानदार, ठेला और साइकिल से सब्जी बेचने वाले भी सुबह-सुबह इसी बाजार से खरीदारी कर शहर के अलग-अलग मोहल्लों में जाकर बिक्री करते हैं. कई होटल-ढाबा संचालक और शादी-समारोह की तैयारी करने वाले लोग भी बड़ी मात्रा में सब्जियां लेने के लिए इसी बाजार का रुख करते हैं, क्योंकि यहां कम कीमत में भरपूर और ताजा सामान मिल जाता है.
नहीं लगता शुल्क
बाजार की एक और बड़ी खासियत यह है कि यहां किसी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाता. किसान बताते हैं कि बाजार सभी के लिए खुला है, इसलिए वे बिना किसी दबाव या खर्च के आराम से अपनी उपज बेच पाते हैं. इससे उनकी आमदनी भी बेहतर होती है और खरीदारों को भी सीधा फायदा मिलता है.
डायमंड गोलचक्कर की इस सुबह की मंडी में हर दिन ताजी हरी सब्जियों की भरमार रहती है—लौकी, खीरा, टमाटर, कद्दू, कुम्हड़ा, बैंगन, आलू, प्याज, अदरक, लहसुन समेत मौसमी सब्जियां बड़ी मात्रा में मिल जाती हैं. ताजगी इतनी होती है कि कई सब्जियां सीधे खेत से तोड़ी हुई नजर आती हैं.
शहर-गांव को जोड़ने वाली कड़ी
कम समय में लगने वाला यह बाजार जमशेदपुर की रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है. किसानों के लिए यह रोजी-रोटी का भरोसेमंद जरिया है, वहीं शहरवासियों के लिए सस्ती और ताजी सब्जियां पाने का सबसे आसान ठिकाना. सच कहें तो साकची का यह सब्जी बाजार केवल खरीद-फरोख्त की जगह नहीं, बल्कि शहर और गांव को जोड़ने वाली एक जीवंत कड़ी बन गया है.
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