कम उम्र में बच्चे सीखेंगे कंटेंट क्रिएशन
आदित्य तिवारी का मानना है कि कंटेंट क्रिएशन अब हर क्षेत्र में उपयोग हो रहा है. चाहे बिजनेस हो, पर्सनल डेवलपमेंट हो या नई चीजें सीखने का माध्यम, कंटेंट अब रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है. उनके अनुसार जिस तरह स्कूलों में हिंदी और अंग्रेजी पढ़ाई जाती है, उसी तरह कंटेंट क्रिएशन भी कम उम्र से सिखाया जाना चाहिए. इससे बच्चे डिजिटल दुनिया को समझेंगे और अपनी रचनात्मकता को सही दिशा दे सकेंगे.
युवा कर सकेंगे पर्सनल ब्रांडिंग
अयान बताते हैं कि जब से शार्क टैंक जैसे कार्यक्रमों में पर्सनल ब्रांडिंग को महत्व मिला है, युवाओं की सोच बदल गई है. अब हर कोई अपनी पहचान बनाना चाहता है. उनका मानना है कि कंटेंट क्रिएशन सीखकर युवा अपनी पर्सनल ब्रांडिंग मजबूत कर सकते हैं, जो आगे चलकर स्टार्टअप या खुद के बिजनेस के लिए भी फायदेमंद साबित हो सकता है. उनके अनुसार यह कौशल भविष्य की अर्थव्यवस्था में अहम भूमिका निभाएगा.
सही उम्र में सही मार्गदर्शन से बनेगी बात
शुभम का कहना है कि आज का युवा पहले से ही सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय है. अगर इसी प्लेटफॉर्म का उपयोग सीखने, खुद को बेहतर बनाने और कुछ नया करने के लिए किया जाए, तो इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा. उनका मानना है कि कम उम्र से ही सही दिशा में मार्गदर्शन मिलने पर बच्चे सिर्फ उपभोक्ता नहीं, बल्कि क्रिएटर बन सकते हैं.
बेहतर भविष्य का निर्माण
आदित्य आगे जोड़ते हैं कि आने वाले समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल टूल्स का दायरा और बढ़ेगा. यह सिर्फ स्कूल या कॉलेज तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि हर क्षेत्र में इसकी जरूरत होगी. ऐसे में अगर बच्चों को अभी से यह समझ और कौशल मिल जाए, तो वे भविष्य के लिए बेहतर तैयार होंगे.
डिजिटल भारत की तरफ मजबूत कदम
महक के अनुसार यह पहल यंग माइंड्स के लिए बेहद फायदेमंद है. उनका मानना है कि जब बच्चों को कम उम्र में ही रचनात्मक और तकनीकी सोच सिखाई जाएगी, तो वे न सिर्फ अपने करियर में आगे बढ़ेंगे, बल्कि देश के विकास में भी योगदान दे सकेंगे. कुल मिलाकर युवाओं की राय में यह योजना डिजिटल भारत की दिशा में एक मजबूत कदम है.
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