जालंधर में गोली मारकर मजदूर की हत्या करने के मामले में जालंधर देहाती पुलिस ने देर रात आरोपी को अरेस्ट कर लिया। आरोपी किसान व बसपा नेता है।
जालंधर देहाती के एसएसपी हरविंदर सिंह विर्क ने बताया कि आरोपी जस्सा से मजदूर मनोज ने सरसों काटने की 600 रुपए आधी दिहाड़ी मांगी जिससे दोनों के बीच गाली-गलौच हो गई थी।
पहले वह सड़क पर एक-दूसरे से झगड़ा करते रहे। इसके बाद जस्सा वर्कसॉप में आया तो मनोज भी पैसे मांगने वहीं पहुंच गया। इस बीच बसपा नेता ने मजदूर पर फायरिंग कर दी। इसके बाद वह वहां से फरार हो गया। डीएसपी विनीत अहलावत और डीएसपी फिल्लौर भरत मसीह की निगरानी में पुलिस थाना गोराया की टीम ने इंस्पेक्टर परमिंदर सिंह के नेतृत्व में आरोपी को गिरफ्तार किया। लाइसेंसी रिवाल्वर से 2 गोलियां चलाई गईं
मौके पर पहुंचे डीएसपी फिल्लौर भारत मसीह लधड़ ने बताया कि आज 14 मार्च 2026 को शाम 5:25 बजे के करीब जसप्रीत सिंह उर्फ जस्सा लंबरदार (पुत्र अवतार सिंह, निवासी गांव घुड़का, थाना गोराया) और मनोज कुमार (पुत्र राय सरन, निवासी पिंड हसनपुर, थाना पिपला, जिला मोतिहारी, बिहार) के बीच पैसे के लेन-देन को लेकर झगड़ा हो गया। झगड़े के दौरान जसप्रीत सिंह ने कथित तौर पर अपने लाइसेंसी .32 बोर रिवॉल्वर से मनोज कुमार पर दो गोलियां चला दी। गोली लगने से मनोज कुमार की मौके पर ही मौत हो गई।
.32 बोर रिवॉल्वर, 3 खाली कारतूस और 3 जिंदा कारतूस बरामद
उन्होंने बताया कि तुरंत कार्रवाई करते हुए थाना गोराया की पुलिस टीमों को आरोपी की तलाश में लगा दिया गया, जिसे बाद में जस्सा को गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने उसके कब्जे से एक लाइसेंसी .32 बोर रिवॉल्वर, 3 खाली कारतूस और 3 जिंदा कारतूस बरामद किए।
आर्म्स एक्ट की धारा 27 के तहत पर्चा
इस मामले में पुलिस स्टेशन गुराया, जिला जालंधर देहाती में एफआईआर नंबर 62 भारतीय न्याय संहिता की धारा 103 तथा आर्म्स एक्ट की धारा 27 के तहत दर्ज कर ली गई है। आगे की जांच जारी है। डीएसपी ने कहा कि जालंधर देहाती पुलिस कानून-व्यवस्था बनाए रखने और अपराध व गुंडागर्दी के खिलाफ जीरो-टॉलरेंस नीति लागू करने के लिए पूरी तरह वचनबद्ध है। बसपा नेता ब्लॉक समीति चुनाव लड़ चुका
बताया जा रहा कि इस साल हुआ ब्लॉक समिति का चुनाव जस्सा लड़ चुका है। वह बसपा नेता और नंबरदार भी है। घटना के बाद जस्सा मौके से फरार हो गया था। वहीं वारदात की सूचना मिलते ही डीएसपी भरत मसीह और थाना गोराया के एसएचओ पुलिस पार्टी के साथ मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया।
डीएसपी भरत मसीह ने बताया कि पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और जल्दी ही दोषी को गिरफ्तार करके हत्या के असल कारण का पता लगाया जाएगा। सवाल-जवाब में पढ़िए प्रत्यक्षदर्शी ने क्या बताया… सवाल- आपका नाम क्या है?
जवाब: नितिन कुमार। सवाल: आपकी वर्कशॉप में क्या वारदात हुई?
जवाब: मैं ट्रैक्टर का काम कर रहा था। जसप्रीत सिंह और मनोज कुमार के बीच पैसों को लेकर कोई झगड़ा हुआ। एक-दूसरे को गाली-गलौज करते-करते वे मारपीट पर उतारू हो गए। देखते ही देखते कुछ ही सेकंड में उन्होंने एक-दूसरे पर हमला कर दिया। सवाल: कितने फायर हुए?
जवाब: लगभग दो से तीन। सवाल: क्या आप मौके पर मौजूद थे?
जवाब : मैं पास में ही था, पर थोड़ा दूर होने के कारण यह पहचान नहीं पाया कि उसे कितनी गोलियां लगीं। यह सब बाद में ही पता चला। सवाल: क्या उसकी मौके पर ही मौत हो गई?
जवाब: मौके पर तो नहीं, उसे करीब 15 से 20 मिनट तक सांस आ रही थी। जब तक 112 नंबर पर सूचना दी और एंबुलेंस को बुलाया, उतने समय में उसकी जान निकल गई। हम थोड़े लेट हो गए। सवाल: मतलब वर्कशॉप के अंदर ही मौत हुई?
जवाब: हां जी, हां जी। किसी ने उसे हाथ तक नहीं लगाया। सवाल: उसकी उम्र कितनी थी?
उत्तर: मनोज कुमार की उम्र करीब 23 से 24 साल थी। सवाल: क्या झगड़े का कारण पता चला?
जवाब: कारण यह था कि सुबह इनका सरसों काटने का कोई ठेका हुआ था। आधी दिहाड़ी लगाने के बाद उन्होंने (जसप्रीत पक्ष ने) मनोज कुमार पर आरोप लगाया कि वह उनके घर की महिलाओं पर गलत नजर रख रहा है। उन्होंने कहा कि हमें तुमसे काम नहीं कराना, तुम जाओ। इस बात को लेकर वे बाहर आ गए। मनोज ने कहा, मेरा जो काम बनता है, उसके 600 रुपए मुझे दे दो, मैं अपने घर चला जाऊंगा। इसी बात पर गाली-गलौज शुरू हो गई। शायद उसने पैसे देने से मना कर दिया होगा। पहले वे सड़क पर लड़े, फिर लड़ते-लड़ते अंदर आ गए। मनोज कुमार ने पहले हमला करने की कोशिश की। लेकिन दूसरे पक्ष के पास रिवॉल्वर थी और उसे देखते ही फायर कर दिया। सवाल: मनोज कुमार इस गांव में कब से रह रहा था?
जवाब: मनोज कुमार को यहां रहते हुए करीब 7 से 8 साल हो गए थे। पहले वे गोभी का काम करता था। अब काम न होने के कारण मजदूरी का काम करता था। सवाल: क्या वह जसप्रीत के पास ही काम करता था?
जवाब: नहीं, वह गांव में खुले तौर पर काम करता था, जहां भी काम मिल जाए। वह दिहाड़ी मजदूर था और अपनी रोजी-रोटी के लिए काम करता था। सवाल: क्या उसकी पत्नी भी साथ थी?
उत्तर: हां, मौके पर पति-पत्नी दोनों साथ में काम कर रहे थे।
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