LPG Cylinder In Rajasthan : जयपुर में घरेलू एलपीजी सिलेंडरों से गैस निकालकर कॉमर्शियल सिलेंडरों में भरने का खेल पकड़ा गया है. रसद विभाग और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में एयरपोर्ट के पास एक सुनसान इलाके से करीब 80 सिलेंडर बरामद हुए. जांच में सामने आया कि घरेलू गैस को होटल और ढाबों तक पहुंचाकर अवैध तरीके से बेचा जा रहा था.
एलजीपी गैस सिलेंडर संकट मामला
छापेमारी के दौरान एक सुनसान जगह पर गैस सिलेंडरों से गैस निकालकर दूसरे सिलेंडरों में भरने का काम चल रहा था. टीम ने मौके पर ही पूरे खेल का पर्दाफाश कर दिया. बताया जा रहा है कि घरेलू गैस को निकालकर उसे कॉमर्शियल सिलेंडरों में भरकर बाजार में महंगे दाम पर बेचा जा रहा था.
छापे में गैस रिफिलिंग का खेल पकड़ा गया
यह कार्रवाई जयपुर में एयरपोर्ट के पास एक सुनसान इलाके में की गई. रसद विभाग और पुलिस की टीम जब मौके पर पहुंची तो वहां घरेलू एलपीजी सिलेंडरों से गैस निकालकर कॉमर्शियल सिलेंडरों में भरने का काम चल रहा था. जानकारी के मुताबिक यह काम लंबे समय से चल रहा था. टीम ने मौके से करीब 80 सिलेंडर भी बरामद किए. जांच में सामने आया कि हर घरेलू सिलेंडर से करीब दो-दो किलो गैस निकाली जा रही थी. इसके बाद इस गैस को कॉमर्शियल सिलेंडरों में भरकर बाजार में ज्यादा कीमत पर बेचा जाता था.
गैस एजेंसी पर ही लगा कालाबाजारी का आरोप
इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि यह काम किसी छोटे दलाल या बाहरी गिरोह द्वारा नहीं किया जा रहा था. आरोप है कि यह पूरा खेल एक गैस एजेंसी की तरफ से ही किया जा रहा था. बताया जा रहा है कि भारत गैस से जुड़ी उर्मिल नाम की गैस एजेंसी इस काम में शामिल बताई जा रही है. एजेंसी से जुड़े लोगों पर आरोप है कि वे घरेलू गैस सिलेंडरों से गैस निकालकर उसे कॉमर्शियल सिलेंडरों में भरवा रहे थे और फिर बाजार में सप्लाई कर रहे थे.
ढाबों और होटलों तक पहुंच रही थी गैस
जांच में यह भी सामने आया है कि यह गैस होटल और ढाबों तक पहुंचाई जा रही थी. यानी घरेलू उपयोग के लिए मिलने वाली गैस को अवैध तरीके से कॉमर्शियल काम में इस्तेमाल किया जा रहा था. हैरानी की बात यह है कि एक तरफ आम लोग घरेलू गैस के लिए लाइन में लगते हैं और सिलेंडर का इंतजार करते हैं, वहीं दूसरी तरफ उसी गैस को अवैध तरीके से निकालकर बाजार में बेचा जा रहा था. इस काम से मोटा मुनाफा कमाने की कोशिश की जा रही थी.
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नाम है आनंद पाण्डेय. सिद्धार्थनगर की मिट्टी में पले-बढ़े. पढ़ाई-लिखाई की नींव जवाहर नवोदय विद्यालय में रखी, फिर लखनऊ में आकर हिंदी और पॉलीटिकल साइंस में ग्रेजुएशन किया. लेकिन ज्ञान की भूख यहीं शांत नहीं हुई. कल…और पढ़ें
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