जयपुर में हरिदेव जोशी पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति ओम थानवी ने कहा कि बदलते परिदृश्य के साथ मीडिया में भी बदलाव आ रहा है। अब लोगों में व्यंग्य की धार को सहने की क्षमता कम हुई है। कभी रेडियों समाचार का स्रोत हुआ करता था, पर अब सरकार इसका लाइसेंस ही नहीं देती है। नारायण सिंह सर्किल स्थित पिंकसिटी प्रेस क्लब में शनिवार को वरिष्ठ पत्रकार स्व. विश्वास कुमार की स्मृति में ‘पत्रकारिता का बदलता परिवेश’ विषय पर परिचर्चा में मुख्य वक्ता के रूप में अपने उद्गार व्यक्त करते हुए थानवी ने बीबीसी का उदाहरण देते हुए कहा कि लोग रेडियों पर सीधे समाचार सुनते थे और वास्तविक स्थिति को जानते थे। उन्होंने कहा कि आज पत्रकारिता का परिदृश्य तेजी से बदल रहा है और इस बदलाव को लेकर चिंता भी स्वाभाविक है। पहले अखबार किसी न किसी विचारधारा से जुड़े होते थे और उनका स्पष्ट दृष्टिकोण होता था। आज के दौर में पत्रकारों की लेखन क्षमता और निर्भीकता कुछ हद तक कम होती नजर आती है। बोलने और सच कहने की इच्छाशक्ति भी पहले की तुलना में कमजोर हुई है। हालांकि तकनीक और नए माध्यमों ने पत्रकारिता को कई नए अवसर भी दिए हैं और काम को आसान बनाया है। उन्होंने कहा कि मीडिया का मूल दायित्व हमेशा सच के साथ खड़ा रहना रहा है, लेकिन वर्तमान समय में लिखने वालों के मन में डर भी दिखाई देता है, जिसके कारण कई बार वे खुलकर नहीं लिख पाते। मूल्यों को बचाए रखना जरूरी- व्यास
कार्यक्रम के दूसरे मुख्य वक्ता वरिष्ठ पत्रकार यशवंत व्यास ने कहा कि वर्तमान समय में पत्रकारिता के सामने कई गंभीर चुनौतियां हैं। उन्होंने कहा कि आज ऐसा लगता है जैसे सच घिसता जा रहा है और अखबारों का फोकस खबरों से ज्यादा इवेंट्स पर होने लगा है। ऐसे समय में पत्रकारों के लिए अपने नैतिक मूल्यों को बचाए रखना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया के अपने दोष और खूबियां दोनों हैं। यह विस्तार का बड़ा मंच देता है, लेकिन कई बार हम अपनी असली ताकत को भूल जाते हैं। सोशल मीडिया ने खोले संवाद के नए रास्ते- बोड़ा
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ पत्रकार राजेन्द्र बोडा ने कहा कि पहले अखबार जनता और सरकार के बीच मजबूत कड़ी हुआ करते थे। लोग अपनी समस्याओं और मुद्दों को अखबारों के माध्यम से सामने लाते थे। लेकिन सोशल मीडिया के आने के बाद इस कड़ी की प्रकृति बदल गई है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया ने संवाद के नए रास्ते तो खोले हैं, लेकिन इससे पारंपरिक पत्रकारिता की भूमिका भी प्रभावित हुई है। इससे पहले कार्यक्रम की शुरुआत में उपस्थित पत्रकारों और अतिथियों ने स्व. विश्वास कुमार के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। कार्यक्रम में शहर के कई वरिष्ठ पत्रकार, मीडिया से जुड़े लोग और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकार नारायण बारेठ को भी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। कार्यक्रम में पिंकसिटी प्रेस क्लब के अध्यक्ष मुकेश मीणा, वरिष्ठ पत्रकार और मीडिया से जुड़े लोगों ने भी अपने विचार साझा किए। कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ पत्रकार जगदीश शर्मा ने किया। वहीं, वरिष्ठ पत्रकार सुनीता चतुर्वेदी ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
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