Jaipur Artist Eco Art: जयपुर के एक प्रतिभाशाली कलाकार ने जले हुए सिगरेट के बट्स को अनोखी कला में बदलकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया है. आमतौर पर कचरे में फेंके जाने वाले सिगरेट बट्स को इकट्ठा कर वे आकर्षक आर्ट डिजाइन तैयार करते हैं. उनकी यह कला न केवल रचनात्मकता का उदाहरण है, बल्कि लोगों को प्रदूषण और कचरा प्रबंधन के प्रति जागरूक भी करती है. सिगरेट बट्स पर्यावरण के लिए हानिकारक होते हैं और लंबे समय तक नष्ट नहीं होते. ऐसे में कलाकार का यह प्रयास ‘वेस्ट टू आर्ट’ की प्रेरणादायक मिसाल बन गया है.
जयपुर के आर्टिस्ट दुनियाभर में अपने आर्ट से खास पहचान बना रहे हैं, लेकिन जयपुर के कुछ ऐसे भी आर्टिस्ट हैं. जो खासतौर पर वेस्ट मटेरियल से बनी आर्ट डिजाइन के लिए जाने जाते हैं. ऐसे ही जयपुर के आर्टिस्ट प्रशांत पांडेय जिन्होंने हालही में सिगरेट के जले लाखों टुकड़ो से बेहतरीन आर्ट डिजाइन तैयार की हैं. जिसकी लोगों में खूब चर्चाएं हैं। हालही में सिगरेट के जले हुए बट्स से तैयार खास आर्ट को मुंबई की मस्कारा आर्ट गैलरी में प्रदर्शित किया गया था. आर्टिस्ट प्रशांत पांडेय की ‘बायोग्राफी’ आर्ट की यह सिगरेट की बट्स से बनी आर्ट की कलाकृतियां हवा में लटकी हुई दिखाई देती हैं. कहीं बहती हुई, कहीं ठहरी हुई नजर आती हैं. जिसे घरों से लेकर ऑफिस में डिजाइन के रूप में लोग इस्तेमाल कर सकते हैं.

जयपुर के आर्टिस्ट प्रशांत पांडेय ने सिगरेट के बट्स से तैयार की इस आर्ट में उन्होंने जले हुए सिगरेट के 3.5 लाख बट्स का स्तेमाल किया हैं. जिसके लिए उन्होंने 5 साल की मेहनत के बाद तैयार किया. पांडेय की इस ‘बायोग्राफी’ आर्ट के लिए खासतौर पर उन्होंने सिगरेट के हर बट को साफ और ट्रीट किया, फिर धागे व बेंत की मदद से पत्तियों, त्वचा और अंगों जैसी आकृतियों में बदला. एक-एक पत्ती जैसी संरचना को बनाने की लिए पांडेय को महिनों का समय लगा और तब जाकर 5 सालों में यह आर्ट डिजाइन बनकर तैयार हुई.

जयपुर के आर्टिस्ट आर्टिस्ट प्रशांत पांडेय लम्बे समय से आर्ट के क्षेत्र में काम करते आ रहे हैं. हाल ही में उनके द्वारा सिगरेट के बट्स से तैयार की गई आर्ट वर्क का आइडिया उन्हें किसानों द्वारा धान सुखाने के बाद दिखने वाली पत्तियों से मिला, जिसके बाद उन्होंने इस अनोखे आर्ट को सालों की मेहनत से तैयार किया. 3:30 लाख सिगरेट बट्स से पांडेय ने कुल 72 पत्तियां तैयार की हैं. जिसमें हर एक पत्ती में 5000 से 7000 सिगरेट बट्स का इस्तेमाल किया गया हैं. हर पत्ती को तैयार करने के लिए पांडेय ने बट्स को गन्ने के कचरे और धागों से जोड़कर पत्तों का रूप दिया.
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3.5 लाख सिगरेट बट्स से बना है, जिसके लिए पांडेय ने पांच साल में सड़कों और कैफे से सिगरेट के बट्स इकट्ठा किए. प्रशांत कहते हैं कि हर सिगरेट एक ठहराव है, सोच और बातचीत के बीच का विराम. इस इंस्टॉलेशन में बट्स को गन्ने के कचरे और धागों से जोड़कर पत्तों का रूप दिया गया है. जिसके चलते पूरी गैलरी जंगल जैसी लगती है, कुछ पत्ते लटके हुए, कुछ हवा में थमे, कुछ ज़मीन पर गिरे. दर्शक जैसे ही इस जगह में प्रवेश करता है, समय जैसे ठहर जाता है. पांडेय का कहना हैं कि हम रोज छोड़ देते हैं, वही अक्सर हमारे समय की सबसे सच्ची गवाही होते हैं. फेंकी गई चीजें सिर्फ़ कचरा नहीं, बल्कि हमारी आदतों और यादों के निशान हैं.

जयपुर के कलाकार प्रशांत पांडे लगातार पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए ऐसी कई आर्ट डिजाइन तैयार कर चुके हैं जिनमें वह विशेष रूप से संगमरमर के अपशिष्ट, ब्लास्ट स्टोन, सिगरेट बट्स, ब्लड स्लाइड्स, इंडस्ट्रियल स्क्रैप और जैविक अवशेषों जैसी सामग्री का उपयोग करते हैं. पांडेय अपशिष्ट पदार्थ से कई प्रकार की आर्ट डिजाइन तैयार कर चुके हैं. प्रशांत मूर्ति भांडा परिवार से आते हैं, जहां चार पीढ़ियों से देव प्रतिमाएं बनाई जा रही हैं. पूजा योग्य मूर्तियों के साथ बनने वाला मार्बल डस्ट और पत्थर के टुकड़े कचरे में बदल जाते हैं.

1984 में जयपुर में जन्मे प्रशांत पांडे जिन्होंने राजस्थान यूनिवर्सिटी से मूर्तिकला में बीएफए और MS यूनिवर्सिटी, बड़ौदा से एमएफए किया है. इसके बाद वह साल 2011 में पेरिस के इकोल दे बो-आर्ट्स में कलाकार रेजिडेंसी के लिए चयनित हुए, जहां उन्होंने प्रसिद्ध आर्ट पोवेरा कलाकार ज्यूसेपे पेनोने के साथ काम किया. इस अनुभव ने उनमें मटिरियल, प्रोसेस और आर्ट क्रिएशन की सोच को और गहरा किया. लगातार मूर्तियों और आर्ट डिजाइन के साथ काम करते हुए पांडेय ने वेनिस के होमो फैबर 2024, इंडिया आर्ट फेयर और कई प्रतिष्ठित प्रदर्शनियों का हिस्सा रह चुके हैं. अपनी खास कला के लिए उन्हें ललित कला अकादमी पुरस्कार और भूपेन बर्मन अवॉर्ड भी सम्मानित किया जा चुका हैं.
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