Israel Iran War Impact: इजरायल, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और अंतरराष्ट्रीय हालात का असर अब जयपुर के कालाडेरा औद्योगिक क्षेत्र में भी दिखाई देने लगा है. कच्चे माल की कमी और कीमतों में तेजी के कारण कई उत्पाद महंगे हो रहे हैं. प्लाईवुड निर्माण में इस्तेमाल होने वाले केमिकल की कीमतों में करीब 40 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हुई है, जिससे प्लाईवुड लगभग 5 प्रतिशत महंगा हो गया है. वहीं सनमाइका यानी लेमिनेट के दाम करीब 20 प्रतिशत बढ़ गए हैं. प्लास्टिक और पीवीसी पाइप से जुड़े उत्पादों की लागत भी तेजी से बढ़ रही है. इससे निर्माण और फर्नीचर उद्योग पर असर पड़ने की आशंका है.
ईरान-अमेरिका के बीच जारी युद्ध और अंतरराष्ट्रीय हालात का असर अब भारत के औद्योगिक बाजार पर भी दिखाई देने लगा है. कच्चे माल की उपलब्धता घटने और उसकी कीमतों में तेजी आने के कारण फैक्ट्रियों में बनने वाले तैयार उत्पाद महंगे होने लगे हैं. जयपुर के कालाडेरा रीको औद्योगिक क्षेत्र की कई कंपनियों ने अपने उत्पादों के दाम बढ़ा दिए हैं, जिससे आने वाले समय में महंगाई और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है.

राजस्थान प्लाइवुड मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष गोपाल कृष्ण अग्रवाल ने बताया कि प्लाईवुड निर्माण में उपयोग होने वाले केमिकल और अन्य कच्चे माल की कीमतों में लगभग 40 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो गई है. कच्चे माल की कमी और लागत बढ़ने के कारण प्लाईवुड के दाम भी बढ़ाए गए हैं. इसके चलते बाजार में प्लाईवुड करीब 5 प्रतिशत तक महंगा हो गया है, जिसका असर फर्नीचर उद्योग पर भी पड़ सकता है.

कालाडेरा रीको एसोसिएशन के अध्यक्ष बनवारी लाल शर्मा ने बताया कि औद्योगिक क्षेत्र में बनने वाले सनमाइका यानी लेमिनेट की कीमतों में भी तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है. वर्तमान परिस्थितियों के चलते लेमिनेट के दाम करीब 20 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं. इससे निर्माण कार्य और फर्नीचर से जुड़े कारोबारियों की लागत भी बढ़ने लगी है और बाजार में तैयार उत्पाद महंगे होने की संभावना है.
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उद्योग से जुड़े उद्यमियों का कहना है कि प्लास्टिक उत्पादों की कीमतों में भी भारी उछाल देखने को मिल रहा है. एक कंपनी के सीईओ कमलेश शर्मा के अनुसार, प्लास्टिक से जुड़े कई उत्पादों की लागत में 40 से 45 प्रतिशत तक वृद्धि हो चुकी है. इसी तरह पीवीसी पाइप और प्लास्टिक पाइप फिटिंग के दामों में भी करीब 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे निर्माण और पाइपलाइन से जुड़े कार्यों की लागत बढ़ सकती है.

आपको बता दें कि कालाडेरा औद्योगिक क्षेत्र में करीब 400 फैक्ट्रियां संचालित हो रही हैं, जिनमें लगभग 25 प्लाईवुड निर्माण इकाइयां शामिल हैं. यहां तैयार होने वाला प्लाईवुड राजस्थान के साथ-साथ देश के कई राज्यों में भेजा जाता है. इसके अलावा 8 से 10 फैक्ट्रियां पीवीसी पाइप निर्माण से जुड़ी हुई हैं. इस औद्योगिक क्षेत्र में करीब 10 हजार से अधिक श्रमिक कार्यरत हैं और उत्पादन में गिरावट का असर इन पर भी पड़ सकता है.

उद्योगपतियों का कहना है कि फिलहाल फैक्ट्रियों में पुराना स्टॉक उपलब्ध होने के कारण कीमतों का असर सीमित दिखाई दे रहा है, लेकिन नया कच्चा माल आने के बाद लागत और बढ़ सकती है. ऐसे के अनुसार यदि अंतरराष्ट्रीय हालात लंबे समय तक ऐसे ही बने रहते हैं तो कास्टिंग सहित अन्य औद्योगिक उत्पादों की कीमतों में भी करीब 10 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे उद्योग जगत पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा.
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