Hyderabad News : हैदराबाद के धूलपेट और सुल्तान बाजार के ऐतिहासिक अखाड़े, जैसे उस्ताद लाला पहलवान अखाड़ा और हनुमान व्यायाम शाला, आज भी परंपरा और गंगा जमुनी तहजीब को संजोए हुए हैं. पुराने शहर के धूलपेट और सुल्तान बाजार जैसे इलाकों में स्थित ये अखाड़े, जिन्हें तालीम भी कहा जाता है, निजामों के काल से चली आ रही परंपरा को आज भी संजोए हुए हैं.
पुराने शहर के धूलपेट और सुल्तान बाजार जैसे इलाकों में स्थित ये अखाड़े, जिन्हें तालीम भी कहा जाता है, निजामों के काल से चली आ रही परंपरा को आज भी संजोए हुए हैं. उस्ताद लाला पहलवान अखाड़ा और हनुमान व्यायाम शाला जैसे स्थान युवाओं के लिए अनुशासन और समर्पण का प्रतीक बने हुए हैं. इन अखाड़ों की सबसे बड़ी पहचान यहां की खास मिट्टी है. इस मिट्टी को तैयार करने में हल्दी, तेल, दही और घी जैसे तत्व मिलाए जाते हैं, जो पहलवानों की त्वचा की रक्षा करते हैं और चोट से बचाने में सहायक होते हैं.
मिट्टी की ताकत और पारंपरिक व्यायाम
इन अखाड़ों में ट्रेडमिल या आधुनिक डंबल्स नहीं मिलते. यहां भारी भरकम नाल, जोड़ी और मुगदर से अभ्यास किया जाता है. कसरत करते पहलवानों को देखना किसी ऐतिहासिक दृश्य जैसा अनुभव देता है. वरिष्ठ उस्तादों का कहना है कि मशीनों से बना शरीर केवल दिखने में मजबूत लगता है, जबकि मिट्टी और गदा से तैयार ताकत उम्र भर साथ देती है. यहां हर अभ्यास परंपरा और अनुभव का परिणाम है.
अखाड़े में प्रवेश करते ही अनुशासन का माहौल महसूस होता है. पहलवानों के लिए ब्रह्मचर्य का पालन, सात्विक आहार और बड़ों के प्रति सम्मान अनिवार्य माना जाता है. यहां हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों के युवा कंधे से कंधा मिलाकर अभ्यास करते हैं. यह दृश्य हैदराबाद की गंगा जमुनी तहजीब का जीवंत उदाहरण प्रस्तुत करता है. परंपरा और आपसी सम्मान इन अखाड़ों की असली पहचान है.
बदलते दौर में चुनौती और विरासत
समय के साथ इन अखाड़ों को बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बन गया है. आधुनिक जीवनशैली और जिम संस्कृति के बढ़ते प्रभाव के बीच भी ये पहलवान अपनी जड़ों से जुड़े हुए हैं. वे लाल मिट्टी में पसीना बहाकर इस प्राचीन परंपरा को जीवित रखे हुए हैं. हैदराबाद आने वाले लोगों के लिए इन अखाड़ों की मिट्टी की महक और यहां की जीवटता को महसूस करना एक अलग ही अनुभव है, जो शहर की असली सांस्कृतिक पहचान से रूबरू कराता है.
About the Author
नाम है आनंद पाण्डेय. सिद्धार्थनगर की मिट्टी में पले-बढ़े. पढ़ाई-लिखाई की नींव जवाहर नवोदय विद्यालय में रखी, फिर लखनऊ में आकर हिंदी और पॉलीटिकल साइंस में ग्रेजुएशन किया. लेकिन ज्ञान की भूख यहीं शांत नहीं हुई. कल…और पढ़ें
Discover more from India News
Subscribe to get the latest posts sent to your email.