गोमुख को जब्त कर मेडिकल परीक्षण के लिए भेजा गया
श्याम नगर थाना पुलिस ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए तत्काल जांच शुरू की. घटनास्थल से बरामद तथाकथित गोमुख को जब्त कर मेडिकल परीक्षण के लिए भेजा गया. इसके लिए तीन वरिष्ठ पशु चिकित्सकों का एक विशेष मेडिकल बोर्ड गठित किया गया. इस बोर्ड में डॉ. लव गोसरी, डॉ. विकास शर्मा और डॉ. अपराजिता शामिल थे. 17 फरवरी को मेडिकल बोर्ड ने अपनी रिपोर्ट पुलिस को सौंप दी. रिपोर्ट में साफ तौर पर कहा गया कि डमी मुख में कोई हड्डी नहीं पाई गई. यदि वास्तव में किसी बछड़े की हत्या कर उसका सिर काटकर लटकाया गया होता, तो उसमें खोपड़ी और जबड़े की हड्डियां मौजूद होतीं. इस निष्कर्ष के बाद गोहत्या की आशंका पूरी तरह समाप्त हो गई.
कब हुई थी विवाद की शुरूआत
इस विवाद की शुरुआत 9 फरवरी को हुई थी, जब दोपहर करीब 1 बजकर 29 मिनट पर शैलेष मीणा नामक युवक ने पुलिस कंट्रोल रूम को फोन कर सूचना दी कि अशोकपुरा सोडाला इलाके की गली नंबर 3 में गाय के बछड़े का सिर काटकर चौराहे पर लटका दिया गया है और मौके पर भीड़ जमा हो रही है. सूचना मिलते ही श्याम नगर थाना पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और स्थिति का जायजा लिया. प्रारंभिक जांच में ही पुलिस को संदेह हुआ कि यह असली सिर नहीं बल्कि कुछ और है. इसके बाद डमी मुख को जब्त कर जांच के लिए भेजा गया.
इसके लिए तैयार किया गया था बछड़े का डमी मुख
पुलिस जांच में सामने आया कि 7 फरवरी को अशोकपुरा निवासी सत्यनारायण शर्मा के घर एक नवजात बछड़ा बीमार हो गया था और देर रात उसकी मौत हो गई थी. अगले दिन 8 फरवरी की सुबह सत्यनारायण शर्मा ने अमन वाल्मीकि नामक व्यक्ति को फोन कर मृत बछड़े को ले जाने के लिए बुलाया. अमन वाल्मीकि ई-रिक्शा लेकर मौके पर पहुंचा और शव को अपने साथ ले गया. बाद में मृत पशु की खाल उतारी गई. जब गाय ने दूध देना बंद कर दिया, तो सत्यनारायण शर्मा ने अमन वाल्मीकि से डमी मुख तैयार करने को कहा, ताकि गाय को उसके बछड़े की मौजूदगी का अहसास हो और वह दूध दे सके. इसके बाद मृत पशु की खाल में भूसा भरकर डमी मुख तैयार किया गया और उसे सिलाई कर गाय के सामने लटका दिया गया.
सीसीटीवी फुटेज की जांच के बाद खुला राज
इस पूरे प्रकरण की पुष्टि आस-पास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज से भी हुई है. पुलिस ने जब सीसीटीवी फुटेज खंगाली, तो मामले की पूरी सच्चाई सामने आ गई. इसके बावजूद मामला राजनीतिक रंग लेता चला गया और इसे गोहत्या का रूप देकर बड़े स्तर पर प्रदर्शन शुरू हो गए. अब मेडिकल रिपोर्ट और सीसीटीवी सबूत सामने आने के बाद इस पूरे विवाद को राजनीतिक द्वेष से जोड़कर देखा जा रहा है. बताया जा रहा है कि गाय के मालिक सत्यनारायण शर्मा के परिवार के कुछ सदस्य भाजपा से जुड़े हुए हैं, जबकि उनके एक भाई पहले कांग्रेस में सक्रिय थे और पूर्व मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास के करीबी माने जाते थे.
हर एंगल से निष्पक्ष जांच के बाद रिपोर्ट तैयार की गई
हाल ही में उन्होंने कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया था. इसके बाद से ही इस मामले को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की हर एंगल से निष्पक्ष जांच की गई है और तथ्यों के आधार पर ही रिपोर्ट तैयार की गई है. फिलहाल जांच एजेंसियों की रिपोर्ट से यह पूरी तरह स्पष्ट हो गया है कि यह गोहत्या का मामला नहीं, बल्कि एक घरेलू घटनाक्रम जुड़ा हुआ था, जिसे गलत सूचना और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के कारण बड़ा रूप दे दिया गया.
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