Osman Sagar Hyderabad: हैदराबाद की गंडिपेट झील यानी उस्मान सागर आधुनिक इंजीनियरिंग और ऐतिहासिक विरासत का अद्भुत संगम है. 1908 की भीषण बाढ़ के बाद तत्कालीन निज़ाम मीर उस्मान अली खान ने सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया को शहर के जल प्रबंधन के लिए आमंत्रित किया. 1920 में इस झील का निर्माण पूरा हुआ, जिससे मूसी नदी के उफान को नियंत्रित किया जा सके. झील के नीचे दबे लगभग 15 गांव और पुराने मंदिर आज भी गर्मियों में दिखाई देते हैं. इस झील ने शहर को आपदा से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
1920 में उस्मान सागर का निर्माण पूरा हुआ
विश्वेश्वरैया की दूरदर्शिता का ही परिणाम था कि 1920 में उस्मान सागर का निर्माण पूरा हुआ, ताकि भविष्य में मूसी नदी के उफान को नियंत्रित किया जा सके. गंडिपेट के बारे में सबसे अजब मान्यता इसकी शुद्धता को लेकर है. बुज़ुर्ग बताते हैं कि दशकों पहले इस झील का पानी इतना स्वच्छ और मीठा था कि लोग इसे बिना किसी फिल्टर या उबाले सीधे पीते थे. उस दौर के लोग इसे कुदरती फिल्टर मानते थे. हालांकि आज के शहरीकरण और प्रदूषण ने इस स्थिति को बदल दिया है, लेकिन ऐतिहासिक दस्तावेजों में इसकी निर्मलता के किस्से आज भी दर्ज हैं.
जलभराव क्षेत्र के खाली कराया गया था 15 गांव
स्थानीय लोगों के बीच एक और बात चर्चा में रहती है. झील के नीचे दबा हुआ गांव. यह महज़ कहानी नहीं बल्कि हकीकत है. झील के विशाल जलभराव क्षेत्र को तैयार करने के लिए उस समय लगभग 15 से अधिक गांवों को खाली कराया गया था. कहा जाता है कि जब गर्मियों में झील का जलस्तर रिकॉर्ड स्तर तक नीचे चला जाता है तो पानी के भीतर दबे पुराने मंदिरों के शिखर और घरों की दीवारें आज भी दिखाई देती हैं. ये खंडहर उन परिवारों के बलिदान की गवाही देते हैं, जिन्होंने शहर को प्यास से बचाने के लिए अपनी पुश्तैनी जमीन छोड़ दी थी.
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दीप रंजन सिंह 2016 से मीडिया में जुड़े हुए हैं. हिंदुस्तान, दैनिक भास्कर, ईटीवी भारत और डेलीहंट में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. 2022 से News18 हिंदी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. एजुकेशन, कृषि, राजनीति, खेल, लाइफस्ट…और पढ़ें
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