उस हादसे में एक एलपीजी टैंकर और अन्य वाहनों की टक्कर से आग इतनी भीषण हो गई थी कि हाईवे पर लंबे समय तक यातायात ठप रहा और कई लोगों को जिंदा जलने से मौत हुई. उस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था, लेकिन इस बार समय रहते पुलिस और स्थानीय प्रशासन की तत्परता ने इस बार एक और बड़ी त्रासदी को टाल दिया.
सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची पुलिस
घटना की शुरुआत तब हुई जब दिल्ली-अजमेर हाईवे पर चल रहे केमिकल लोडेड ट्रक में अचानक आग लग गई. आग की लपटें तेजी से फैलने लगीं और ट्रक का केमिकल लोड हाईवे पर फैलने की आशंका बढ़ गई. आस-पास के वाहन चालक और राहगीर घबरा गए, क्योंकि आग किसी भी क्षण विस्फोटक रूप ले सकती थी. सूचना मिलते ही भांकरोटा थाने के एसएचओ श्रीनिवास जांगिड़ तुरंत अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे. उन्होंने बिना किसी देरी के हाईवे पर यातायात रोकने का आदेश दिया, जिससे आग प्रभावित क्षेत्र से अन्य वाहनों को दूर रखा जा सका.
पुलिसकर्मियों ने खुद ही फायर फाइटर की भूमिका निभाई
दो साल पहले भी हुई थी भीषण “भांकरोटा अग्निकांड”
यह घटना उस “भांकरोटा अग्निकांड” की याद दिलाती है, जो दिसंबर 2024 में इसी हाईवे पर हुआ था. तब एक केमिकल या गैस टैंकर की टक्कर से आग लगी थी, जिसमें दर्जनों वाहन जल गए और कई निर्दोष लोगों की जान चली गई. उस हादसे में हाईवे पर लंबा जाम लगा था और बचाव कार्य में काफी देरी हुई थी. लेकिन इस बार पुलिस की सतर्कता और तत्काल कार्रवाई ने स्थिति को संभाल लिया. यदि यातायात नहीं रोका जाता और पुलिस टीम समय पर नहीं पहुंचती, तो आग आस-पास के वाहनों तक फैलकर बड़ा विस्फोट पैदा कर सकती थी, जिसमें कई जानें जा सकती थी.
पुलिसकर्मियों ने जान जोखिम में डालकर बड़ा हादसा टाल दिया
पुलिस की इस तत्परता की सराहना की जा रही है. एसएचओ श्रीनिवास जांगिड़ और उनकी टीम ने साबित किया कि आपातकाल में सही समय पर सही निर्णय कितने महत्वपूर्ण होते हैं. स्थानीय लोगों ने भी पुलिस की बहादुरी की तारीफ की और कहा कि उनकी वजह से एक बड़ी तबाही टल गई. प्रशासन ने हाईवे पर केमिकल और खतरनाक सामग्री ले जाने वाले वाहनों की जांच बढ़ाने की बात कही है, ताकि भविष्य में ऐसे हादसों से बचा जा सके. पुलिसकर्मियों ने जान जोखिम में डालकर की गई इस कार्रवाई ने न केवल एक बड़ा हादसा टाला.
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