Telangana Local News : तेलंगाना के कोन्डागट्टू अंजनय स्वामी मंदिर में 40 दिनों की विशेष दीक्षा को संतान प्राप्ति से जोड़ा जाता है. सात्विक जीवन, नियमों का पालन और प्रभु की उपासना के साथ यह परंपरा आज भी हजारों दंपत्तियों के विश्वास का केंद्र बनी हुई है. हनुमान जयंती पर यहाँ श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है.
स्थानीय मान्यताओं और मंदिर के इतिहास के अनुसार जो दंपत्ति संतान प्राप्ति की कामना रखते हैं, वे यहाँ 40 या 41 दिनों का विशेष अनुष्ठान करते हैं. इस दौरान श्रद्धालु मंदिर परिसर या उसके निकट रहकर बेहद सात्विक जीवन व्यतीत करते हैं. नियमों के अनुसार भक्त जमीन पर सोते हैं, केवल सात्विक भोजन करते हैं और प्रतिदिन विधि-विधान से हनुमान जी की उपासना करते हैं. कहा जाता है कि इस कठिन तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान अंजनय स्वामी भक्तों की झोली भर देते हैं. मंदिर में मिलने वाले संजीवनी चंदन को भी अत्यंत चमत्कारी माना जाता है. भक्त मानते हैं कि प्रभु के बाएं हाथ के कटोरे से मिला यह चंदन न केवल संतान सुख देता है, बल्कि मानसिक रोगों और असाध्य बीमारियों से भी मुक्ति दिलाता है.
मंदिर की अनोखी मान्यता
लगभग 300 साल पहले एक चरवाहे द्वारा निर्मित इस मंदिर की मूर्ति अपने आप में अनोखी है. यहाँ हनुमान जी के एक तरफ अंजनय स्वामी और दूसरी तरफ नृसिंह स्वामी के मुख के दर्शन होते हैं. मान्यता है कि त्रेतायुग में जब हनुमान जी लक्ष्मण के लिए संजीवनी पर्वत लेकर जा रहे थे, तब उसका एक छोटा सा हिस्सा यहाँ गिरा था, जिसे आज कोन्डागट्टू कहा जाता है.
हनुमान जयंती पर उमड़ती आस्था
हनुमान जयंती के अवसर पर यहाँ का नजारा देखने लायक होता है, जब लाखों की संख्या में श्रद्धालु हनुमान दीक्षा लेकर पदयात्रा करते हुए मंदिर पहुँचते हैं. प्रशासन अब इस मंदिर के विस्तार के लिए करोड़ों रुपये का मास्टर प्लान भी तैयार कर रहा है, ताकि यहाँ आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएँ मिल सकें.
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नाम है आनंद पाण्डेय. सिद्धार्थनगर की मिट्टी में पले-बढ़े. पढ़ाई-लिखाई की नींव जवाहर नवोदय विद्यालय में रखी, फिर लखनऊ में आकर हिंदी और पॉलीटिकल साइंस में ग्रेजुएशन किया. लेकिन ज्ञान की भूख यहीं शांत नहीं हुई. कल…और पढ़ें
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