जम्मू-कश्मीर सरकार ने डल झील के निवासियों के पुनर्वास के लिए एक नई और पर्यावरण-अनुकूल नीति स्पष्ट की है। अब परिवारों को डल से दूर करने के बजाय यथास्थान संरक्षण मॉडल के तहत झील के पारिस्थितिकी तंत्र के भीतर ही स्थायी रूप से बसाया जाएगा।
आवास और शहरी विकास विभाग ने विधानसभा में बताया है कि अब तक 1,808 परिवारों को रखे अर्थ कॉलोनी में स्थानांतरित किया जा चुका है लेकिन अब नीति विस्थापन से हटकर संरक्षण-आधारित आवास की ओर बढ़ गई है। इसमें डल झील में रहने वालों को झील के पारिस्थितिकी तंत्र का एक अभिन्न अंग माना गया है।
हालांकि जवाब में यह स्पष्ट किया गया कि पिछले दशकों में बड़े पैमाने पर विस्थापन से कोई खास परिणाम नहीं मिला है। ये जानकारी विधायक तनवीर सादिक के पूछे गए गैर-तारांकित प्रश्न के लिखित उत्तर में सदन में दी गई है। कश्मीर के मंडलायुक्त की अध्यक्षता वाली उच्च-स्तरीय समिति की चर्चाओं का हवाला देते हुए सरकार ने कहा कि यथास्थान संरक्षण मॉडल को अपनाने का निर्णय लिया गया है।
जम्मू और कश्मीर झील संरक्षण और प्रबंधन प्राधिकरण (जेकेएलसीएमए) को सार्वजनिक परामर्श के जरिए एक व्यापक नीति बनाने का जिम्मा सौंपा गया है ताकि पर्यावरण सुरक्षा के साथ निवासियों का आजीविका संतुलन बना रहे।
अधिकतम पुनर्वास वाली बस्तियां बाहर ही रहेंगी
नीतिगत ढांचे के अनुसार प्राथमिकता वाली बस्तियों जहां अधिकतम पुनर्वास पहले ही किया जा चुका है, को यथास्थान संरक्षण से बाहर रखा जाएगा जबकि झील के भीतर केवल सीमित संख्या में संरचनाओं की पहचान अद्यतन सर्वेक्षणों के आधार पर पुनर्वास के लिए की जाएगी। झील के अंदर संरचनाओं की कुल संख्या सत्यापन के बाद तय की जाएगी।
सरकार ने कहा कि डल झील में रहने वालों को कहीं और विस्थापित करने के बजाय इनके लिए झील में ही छोटे-छोटे इको-विलेज विकसित किए जा रहे हैं। यह पुनर्वास और संरक्षण योजना को जेकेएलसीएमए के निदेशक मंडल द्वारा सैद्धांतिक रूप से अनुमोदित किया गया है और उच्च-स्तरीय समिति द्वारा समर्थित किया गया है।
Discover more from India News
Subscribe to get the latest posts sent to your email.