केंद्र सरकार ने दिल्ली-एनसीआर के उद्योगों को 31 दिसंबर तक उत्सर्जन निगरानी (मॉनिटर) प्रणाली और वायु प्रदूषण नियंत्रण उपकरण लगाने का समय दिया है। ऐसा नहीं करने पर अत्यधिक उत्सर्जन करने वाले उद्योगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है। साथ ही दिल्ली-एनसीआर राज्यों को इसी महीने के भीतर 2026 के लिए अपनी वायु प्रदूषण नियंत्रण योजनाओं को अंतिम रूप देने का निर्देश भी दिया है।
दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण के खतरनाक स्तर पर पहुंचने के बीच केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव की अध्यक्षता में बुधवार को हुई समीक्षा बैठक में ये फैसले लिए गए। बैठक में वायु प्रदूषण की स्थिति और किए जा रहे शमन उपायों का आकलन किया गया। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के चेयरपर्सन वीर विक्रम यादव ने बैठक में प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों के बारे में प्रस्तुति दी।
उन्होंने बताया कि दिल्ली-एनसीआर में ऐसे 2,254 अत्यधिक प्रदूषणकारी उद्योग हैं जिन्होंने अभी तक अपने ऑनलाइन सतत उत्सर्जन निगरानी प्रणाली (ओसीईएमएस) को सीपीसीबी सर्वर से नहीं जोड़ा है। उन्होंने कहा कि 31 दिसंबर की समय सीमा का पालन न करने वाले उद्योगों के खिलाफ बंद करने सहित सख्त कार्रवाई की जाएगी।
पराली जलाने के मामले कम हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग के अध्यक्ष राजेश वर्मा ने कहा कि इस बार पराली जलाने की घटनाओं में काफी कमी आई है। इसे बनाए रखने के लिए ही राज्यों और केंद्रशासित प्रदेश को इसके लिए एक कार्ययोजना को बनाने के लिए कहा गया है। जनवरी से ही इस दिशा में काम किया जाएगा। उन्होंने कहा इसके लिए चंडीगढ़ में एक बैठक की जाएगी। इसके अलावा सीक्यूएम एक विशेषज्ञ समिति का गठन करेगा।
हाईकोर्ट ने शीर्ष कोर्ट जाने की दी सलाह
दिल्ली की जहरीली होती हवा को लेकर ग्रेटर कैलाश-दो वेलफेयर एसोसिएशन की जनहित याचिका पर बुधवार को दिल्ली हाईकोर्ट ने सुनवाई की। मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तुषार राव गेदेला की पीठ ने स्पष्ट किया कि चूंकि यह मुद्दा पिछले कई साल से सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। शीर्ष अदालत लगातार निर्देश दे रही है, इसलिए हाईकोर्ट में समानांतर कार्यवाही करना उचित नहीं होगा।
मुख्य न्यायाधीश की डबल बेंच ने कहा कि हम यह नहीं कह रहे कि हम याचिका को सुन नहीं सकते या इसमें कोई दम नहीं है। हमारी सिर्फ एक चिंता है पिछले 15-20 दिनों से सुप्रीम कोर्ट लगातार दिल्ली की वायु गुणवत्ता पर निर्देश दे रहा है। अगर हम भी साथ-साथ चलें तो क्या यह दोहरी कार्यवाही नहीं होगी? हाल के दिनों में आरोप लगाए गए थे कि की तरीके से प्रदूषण की वास्तविक रीडिंग कम दिखाई जा रही है। सीपीसीबी ने इन सभी आरोपों को निराधार बताया है।
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