रोहतक के विधायक भारत भूषण बत्रा के बेटे एडवोकेट सिद्धार्थ बत्रा ने पेरिस में चीफ जस्टिस सूर्यकांत के सामने अपना संबोधन दिया। पेरिस में आयोजित इंडो-फ्रेंच लीगल एंड बिजनेस कॉन्फ्रेंस में सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड सिद्धार्थ बत्रा ने भारतीय और फ्रांसीसी विधि समुदाय को संबोधित किया। यह सम्मेलन पेरिस बार एसोसिएशन और इंडो-फ्रेंच चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के संयुक्त तत्वावधान में हुआ। एडवोकेट सिद्धार्थ बत्रा ने भारत के चीफ जस्टिस सूर्यकांत की न्यायिक यात्रा और उनके न्याय दर्शन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने 37 वर्ष की आयु में हरियाणा के महाधिवक्ता के रूप में कार्य किया और बीते 24 वर्षों में एक न्यायाधीश के रूप में कानून, समानता और मानवीय संवेदनाओं के संतुलन के साथ न्याय प्रदान किया है। सर्वोच्च न्यायालय की भूमिका को किया रेखांकित
एडवोकेट सिद्धार्थ बत्रा ने भारत के सर्वोच्च न्यायालय की भूमिका पर चर्चा करते हुए बताया कि हर वर्ष लगभग 60,000 नए मामले सर्वोच्च न्यायालय में दाखिल होते हैं, जो भारतीय लोकतंत्र में न्यायपालिका के प्रति जनता के विश्वास को दर्शाता है। सिद्धार्थ बत्रा ने भारत और फ्रांस के बीच बढ़ते संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि व्यापार और कूटनीति के साथ-साथ अब कानूनी सहयोग व संवाद को मजबूत करने का समय आ गया है। वकीलों के रक्षा अधिकार को बताया असंक्रमणीय
एडवोकेट सिद्धार्थ बत्रा ने पेरिस बार एसोसिएशन द्वारा हाल ही में पारित उस प्रस्ताव की सराहना की, जिसमें वकीलों की स्वतंत्रता, पेशेवर गोपनीयता और रक्षा के अधिकार को असंक्रमणीय (non-negotiable) बताया गया है। जब वकीलों पर दबाव पड़ता है, तो वास्तव में कानून के शासन पर खतरा उत्पन्न होता है। पेरिस की दार्शनिक परंपरा का किया उल्लेख
एडवोकेट सिद्धार्थ बत्रा ने पेरिस की ऐतिहासिक और दार्शनिक परंपरा का उल्लेख करते हुए फ्रेंच भाषा में अपना संदेश देते हुए कहा कि कानून समय में स्थिर नहीं होता, वह जीवंत होता है, विकसित होता है और देशों के बीच सेतु बनाता है। एडवोकेट सिद्धार्थ बत्रा का संबोधन भारत और फ्रांस के बीच न्याय, स्वतंत्रता और मानवीय मूल्यों पर आधारित साझा दृष्टिकोण को सशक्त करता है।
Discover more from India News
Subscribe to get the latest posts sent to your email.