राज्यमंत्री ओटाराम देवासी, सांसद लुंबाराम चौधरी और भाजपा जिलाध्यक्ष डॉ. रक्षा भंडारी ने रविवार को सिरोही जिला मुख्यालय स्थित सर्किट हाउस में पत्रकारों से बातचीत करते हुए विकसित भारत रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) – वीबी-जीरामजी योजना की विशेषताओं और लाभों को उजागर किया। भाजपा नेताओं ने इस अवसर पर कहा कि योजना के तहत पहले की कई खामियों को दूर किया गया है और श्रमिकों को इसका प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। उन्होंने बताया कि मोदी सरकार ने रोजगार गारंटी की अवधि 100 दिन से बढ़ाकर 125 दिन कर दी है, जिससे ग्रामीण श्रमिकों की वार्षिक आय में वृद्धि होगी।
तकनीक से पारदर्शिता और फर्जीवाड़े पर रोक
भाजपा नेताओं ने बताया कि योजना में बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण और उपस्थिति प्रणाली के माध्यम से फर्जी श्रमिक, डुप्लीकेट जॉब कार्ड और फर्जी भुगतान पर पूरी तरह रोक लगेगी। वेतन और भत्तों का सीधा डिजिटल भुगतान (DBT) होने से बिचौलियों, देरी और धन के दुरुपयोग पर भी रोक लगेगी। वीबी-जीरामजी योजना मनरेगा की तुलना में अधिक पारदर्शी और श्रमिक-केंद्रित है। इसमें श्रमिकों के कल्याण और गांवों के समग्र विकास के लिए ऐतिहासिक और दूरदर्शी कदम उठाए गए हैं।
कांग्रेस पर निशाना
पत्रकारों से बातचीत के दौरान भाजपा नेताओं ने कहा कि कांग्रेस और उसके नेता योजना को लेकर भ्रम फैलाकर आम जनता को गुमराह कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस शासनकाल में मनरेगा भ्रष्टाचार का केंद्र बनी हुई थी। राज्यमंत्री ओटाराम देवासी ने कहा, ‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विकसित भारत 2047 के राष्ट्रीय विजन के अनुरूप ग्रामीण विकास का नया ढांचा तैयार किया गया है। इस अधिनियम में पुराने प्रावधानों को संशोधित कर गांवों को अधिक अधिकार और स्वायत्तता दी गई है।’
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ग्रामीण विकास और स्थायी आजीविका का संकल्प
भाजपा नेताओं ने बताया कि इस अधिनियम के माध्यम से मनरेगा की अनियमितताओं को तकनीक का उपयोग कर समाप्त किया जाएगा। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में आधारभूत संरचना भी मजबूत होगी। उन्होंने कहा कि अब श्रमिकों को 125 दिन की वैधानिक रोजगार गारंटी मिलेगी। बेरोजगारी भत्ते की व्यवस्था अब केवल कागजों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि स्पष्ट समय सीमा और जवाबदेही के साथ लागू होगी। भाजपा जिला मीडिया प्रभारी रोहित खत्री ने कहा कि योजना मजदूरों के काम की असली कद्र, मेहनत का समय पर सम्मान और पारदर्शी प्रणाली को सुनिश्चित करती है। इससे ग्रामीण श्रमिकों और किसानों को बड़ा आर्थिक और सामाजिक संबल मिलेगा।
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