Wheat Growing Tips: रबी सीजन शुरू हो गया है. इस मौसम में गेहूं की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है. साथ ही सरसों, दलहन और सब्जियां भी खूब उगाई जाती हैं. हालांकि सबसे ज्यादा बिहार में इस मौसम गेहूं की खेती होती है. मगध के क्षेत्र में ज्यादातर किसान गेहूं की बुवाई कर चुके हैं. 20 से 25 दिन बीत गए हैं. जिस प्रकार से ठंड बढ़ गई है, उससे मौसम में नमी बरकरार है. अभी का तापमान 20 से 21 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है, जो गेहूं की खेती के लिहाज से काफी अच्छा माना जाता है.
जहानाबाद में जिन किसानों ने गेहूं की खेती कर ली है और 20 से 25 दिन हो गए हैं तो उनको कृषि विज्ञान केंद्र गंधार के एक्सटेंशन एक्सपर्ट डॉक्टर निराला कुमार ने एक जरूरी सलाह जारी की है, जिसके तहत किसान भाई यदि कुछ बातों का ख्याल रखते हैं तो तापमान और खरपतवार दोनों का नियंत्रण संभव है.

एक्सपर्ट का मानना है कि अभी जिस प्रकार से तापमान नियंत्रित है यदि कोई किसान अब तक गेहूं की बुवाई ना की है तो हैप्पी सीडर मशीन से बुवाई कर सकते हैं. इससे उनका समय बचेगा. साथ ही पैसों की भी बचत होने वाली है.

एक्सपर्ट की माने तो जिन किसानों ने मगध के क्षेत्र में एचडी 2967 किस्म के गेहूं की वैरायटी लगाए हैं उन किसानों के लिए एक जरूरी सलाह यह है कि अभी 20 से 25 दिन जिस प्रकार से बीते हैं किसानों को खेत में कुछ दवाई का छिड़काव करना जरूरी है. इससे बीड्स का कंट्रोल अच्छे से हो जाएगा और फसल की बाली मजबूत होगी.
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एक्सपर्ट निराला कुमार ने कहा कि 20 से 25 दिन पहले गेहूं की बुवाई जिन किसानों ने की है उनके खेत में अभी घास निकलना शुरू हो गया होगा. इसे नियंत्रित करने के लिए बाजार में एक दवाई आती है, जिसका नाम टोटल है. इसका केमिकल कंपोजिशन सल्फो सल्फ्यूरान और मेट सल्फ्यूरान है. इस दवाई का छिड़काव करने से आपके खेत से खरपतवार की समस्या खत्म हो जाएगी और आपका गेहूं की पैदावार बेहतर हो सकती है.

मशीन विधि से खेती करने के फायदे को लेकर उन्होंने कहा कि यदि आप हैप्पी सीडर मशीन और जीरो टिलेज मशीन से खेती करते हैं तो पराली जलाने की समस्या खत्म हो जाती है. साथ ही पराली मल्चिंग का काम करता है. श्रमिकों की भी जरूर कम पड़ती है. बीज की बचत होती है. इसके साथ-साथ उत्पादन में अच्छा खासा अंतर देखने को मिलता है. कहीं ना कहीं यह काफी फायदे का सौदा किसानों के लिए हो सकता है.
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