घटना शनिवार सुबह करीब 10 बजे की है। सागर रेलवे स्टेशन इलाके में रहने वाले पवन साहू, जो मूल रूप से उत्तर प्रदेश के ललितपुर जिले के मड़ावरा के रहने वाले हैं, पिछले 12-13 वर्षों से सागर में रहकर सब्जी बेचने का काम करते हैं। शनिवार को उनकी पत्नी पार्वती साहू की तबीयत अचानक ज्यादा बिगड़ गई। गरीबी और अज्ञानता के चलते पवन को एंबुलेंस कैसे बुलाई जाती है, यह जानकारी नहीं थी। उनके पास इतने पैसे भी नहीं थे कि वह कोई निजी वाहन कर सकें। मजबूरन उन्होंने अपनी पत्नी को उसी हाथ ठेले पर लिटाया, जिससे वह सब्जी बेचते थे और अस्पताल की ओर दौड़ पड़े।
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तमाशबीन बना रहा शहर, किसी ने नहीं रोकी गाड़ी
हृदयविदारक बात यह रही कि अस्पताल पहुंचने से पहले ही पार्वती ने रास्ते में दम तोड़ दिया। पत्नी की मौत के बाद बेबस वृद्ध उसी ठेले पर शव को लेकर श्मशान घाट की ओर चल दिया। शहर के व्यस्त रास्तों से करीब 2 किलोमीटर तक वह शव लेकर निकलता रहा। सुबह का वक्त था, सड़कों पर सैकड़ों गाड़ियां और हजारों लोग मौजूद थे, लेकिन किसी ने भी उस वृद्ध की मदद करने या शव वाहन बुलाने की जहमत नहीं उठाई।
पार्षद प्रतिनिधि ने मदद की
जब पवन साहू अपनी पत्नी का शव लेकर मोतीनगर चौराहा पहुंचे, तब वहां मौजूद पार्षद प्रतिनिधि नरेश यादव और कुछ अन्य युवाओं की नजर उन पर पड़ी। वृद्ध को रोते हुए और ठेले पर शव ले जाते देख उन्होंने उसे रोका। हालात जानने के बाद नरेश यादव और स्थानीय लोगों ने आगे बढ़कर मदद की। लोगों के सहयोग से ही पवन की पत्नी का अंतिम संस्कार विधि-विधान से संपन्न कराया गया।
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