हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने आवेदन की अंतिम तिथि तक वैध प्रमाणपत्र जमा न कर पाने पर एक महत्वपूर्ण फैसला दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि उम्मीदवार जो ओबीसी श्रेणी से संबंध रखता है, केवल आवेदन की कट ऑफ डेट तक वैध प्रमाणपत्र जमा न कर पाने के आधार पर उसे सरकारी नौकरी से वंचित नहीं किया जा सकता। न्यायालय ने कहा कि जाति प्रमाणपत्र केवल उस तथ्य की पुष्टि करता है जो जन्म से अस्तित्व में है। न्यायाधीश संदीप शर्मा की अदालत ने कहा है कि कोई व्यक्ति अपनी जाति जन्म से प्राप्त करता है, न कि प्रमाणपत्र जारी होने की तिथि से। प्रमाणपत्र केवल उस स्थिति का एक प्रमाण है।
अदालत ने कहा कि श्रेणी जन्म से निर्धारित होती है। आरक्षण का उद्देश्य समाज के पिछड़े वर्गों को समान अवसर प्रदान करना है। तकनीकी आधार पर (जैसे प्रमाणपत्र देरी से मिलना) इसे रोकना संवैधानिक भावना के खिलाफ है।चूंकि विभाग ने उम्मीदवार को लिखित परीक्षा में बैठने दिया और दस्तावेज सत्यापन के लिए बुलाया, इसका अर्थ है कि उसे शुरू से ओबीसी उम्मीदवार माना गया था।
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