मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि हिमाचल प्रदेश की संपदा से जुड़े केसों में सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कई नामी वकील खड़े किए हैं। वाइल्ड फ्लावर हॉल और जेएसडब्ल्यू के मामले में सरकार को बड़ी जीत मिली है। इन दोनों मामलों के फैसले आने के बाद सरकार के कोष में करोड़ों रुपये पहुंचना शुरू हो गए हैं। बीबीएमबी, शानन और वाटर सेस के केस अभी चल रहे हैं।
भाजपा विधायक विपिन सिंह परमान ने प्रश्नकाल के दौरान मामला उठाते हुए पूछा कि सुप्रीम कोर्ट में चल रहे प्रदेश के मामलों में किसी वकील को कितनी फीस दी जा रही है। जवाब में मुख्यमंत्री ने बताया कि पी चिदंबरम, कपिल सिब्बल, मुकुल रोहतगी, अभिषेक मनु सिंघवी जैसे नामी वकील प्रदेश के मामलों की सु्प्रीम कोर्ट में पैरवी कर रहे हैं। इस पर नेता विपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री सदन को गुमराह कर रहे हैं। अभिषेक मनु सिंघवी ने तो सरकार के खिलाफ पैरवी की थी।
उन्होंने कहा कि सरकार बचाने के लिए सीपीएस मामले में प्रति पेशी करोड़ों रुपये की वकीलों को फीस दी गई। यह तो प्रदेश हित नहीं था। जवाब में सुक्खू ने कहा कि लोकतंत्र बचाने के लिए सीपीएस केस में सिंघवी को सुप्रीम कोर्ट में खड़ा किया था। ओबराय और जेएसडब्ल्यू मामले में पी चिदंबरम, मुकुल रोहतगी और कपिल सिब्बल ने पैरवी की। जेएसडब्ल्यू केस में जीत के बाद 200 करोड़ रुपये सरकार को मिले हैं।
वाइल्ड फ्लावर हॉल केस में 300 करोड़ रुपये मिलेंगे। बीबीएमबी केस में हिमाचल के हक में फैसला आया है। अब 14 साल से पैसा नहीं मिलने का केस लड़ा जा रहा है। उन्हाेंने कहा कि सरकार की ओर से वकीलों को फीस की अदायगी की गई है। जल्द ही फीस की सारी जानकारी दे दी जाएगी।
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