कोरबा में पदस्थ नगरसेना के जवानों ने एक बार फिर अपने रौद्र रूप का प्रदर्शन करते हुए कमांडेंट को हटाने की मांग को दोहराया है। मंगलवार को नगरसेना के लगभग 60 जवान परेड ग्राउंड में एकत्रित हुए और कमांडेंट ए.के. एक्का के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। जवानों का आरोप है कि लंबे समय से वे प्रताड़ना और अभद्र व्यवहार का सामना कर रहे हैं, लेकिन उनकी शिकायतों पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।
जवानों के प्रदर्शन की सूचना मिलते ही तहसीलदार बजरंग साहू और नगर पुलिस अधीक्षक प्रतीक चतुर्वेदी (कोरबा) सिविल लाइन थाना प्रभारी नवीन पटेल पुलिस स्टाफ के साथ मौके पर पहुंचे और स्थिति को संभालने का प्रयास किया। अधिकारियों ने जवानों से बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनीं। हालांकि जवान अपने रुख पर अड़े रहे और स्पष्ट रूप से कहा कि जब तक कमांडेंट को यहां से नहीं हटाया जाएगा, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
नगरसेना के जवानों का कहना है कि इससे पहले भी वे कमांडेंट के खिलाफ मोर्चा खोल चुके हैं। उस दौरान शिकायत के बाद उच्च अधिकारी मौके पर पहुंचे थे, लेकिन आश्वासन के बावजूद हालात जस के तस बने हुए हैं। जवानों का आरोप है कि जिन्होंने पहले खुलकर अपनी बात रखी थी, उन्हें अब और अधिक परेशान किया जा रहा है, जो पूरी तरह से गलत है और इस पर तुरंत अंकुश लगना चाहिए।
बताया जा रहा है कि मंगलवार को नगरसेना कार्यालय में एकत्रित होकर जवानों ने एक स्वर में अपनी पीड़ा व्यक्त की। उन्होंने कहा कि मानसिक दबाव, प्रताड़ना और अपमानजनक व्यवहार के कारण उनका काम करना मुश्किल हो गया है। जवानों ने प्रशासन से मांग की कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और कमांडेंट को कोरबा से हटाया जाए, ताकि कार्यस्थल का माहौल सामान्य हो सके।
इस मामले में अतिरिक्त तहसीलदार बजरंग साहू ने बताया कि इनके द्वारा इससे पहले भी कमांडेड के खिलाफ अपनी बात रखी थी जहां शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं होने की बात को लेकर एकत्रित हुए हैं उच्च अधिकारियों को अवगत कराया जाएगा
कोरबा सीएसपी प्रतीक चतुर्वेदी ने बताया कि किसी तरह की स्थिति समस्या खड़ा ना हो उसे देखते हुए मौके पर पहुंचे हैं और जानकारी लेते हुए उनकी समस्या सुनी गई है। वहीं विरोध प्रदर्शन होने की जानकारी होते ही कमांडेड एक्का अपने दफ्तर में नजर नहीं आए दफ्तर बंद था।
लगातार हो रहे इस विरोध प्रदर्शन से प्रशासन की चिंता बढ़ गई है। अब देखना यह होगा कि उच्च स्तर पर इस मामले में क्या निर्णय लिया जाता है और नगरसेना के जवानों की मांगों पर कब तक कार्रवाई होती है।
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