होमगार्ड की एक्सिडेंट में हुई मौत मामले में चंडीगढ़ कोर्ट ने इंश्योरेंस कंपनी को 45 लाख देने के दिए आदेश।
पुलिस चेक पोस्ट पर ड्यूटी के दौरान तेज रफ्तार ट्रैक्टर की टक्कर से होमगार्ड की मौत के मामले में चंडीगढ़ डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने फैसला सुनाया है। कोर्ट ने हादसे को ड्राइवर की लापरवाही मानते हुए मृतक सुरजीत सिंह की पत्नी और माता-पिता को कुल 45 लाख 9 हजार 6
इसके साथ ही इस राशि पर 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी मिलेगा। वहीं, कोर्ट ने कहा कि ड्यूटी के दौरान सड़क पर तैनात कर्मियों की सुरक्षा बेहद अहम है और ऐसे मामलों में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जा सकती।
काफी दूर तक घसीट कर ले गया ट्रैक्टर
2 फरवरी 2021 को सुरजीत सिंह, हिमाचल प्रदेश के पांवटा साहिब क्षेत्र में बेहराल चेक पोस्ट पर ड्यूटी पर तैनात थे। शाम करीब 7 बजे, जब वह बैरिकेड के पास खड़े थे, तभी यमुनानगर की ओर से आ रहा ट्रैक्टर, एक ट्रक को ओवरटेक करते हुए गलत साइड में आ गया।
ट्रैक्टर ने पहले बैरिकेड को टक्कर मारी और फिर सुरजीत सिंह को चपेट में ले लिया। टक्कर के बाद ट्रैक्टर सुरजीत सिंह को काफी दूरी तक घसीटता हुआ ले गया। गंभीर हालत में सुरजीत सिंह को पहले पांवटा साहिब के सिविल अस्पताल और फिर पीजीआई चंडीगढ़ रेफर किया गया, जहां इलाज के दौरान 15 फरवरी 2021 को उनकी मौत हो गई।
साबित हुई ड्राइवर की लापरवाही
कोर्ट ने घटना के चश्मदीद गवाह के बयान, एफआईआर और चालान के आधार पर माना कि हादसा ट्रैक्टर ड्राइवर फारुक की लापरवाह ड्राइविंग से हुआ। ड्राइवर और वाहन मालिक की ओर से कोई भी गवाही नहीं की गई, जिस पर कोर्ट ने उनके खिलाफ नकारात्मक अनुमान लगाया।
मुआवजे का आकलन
कोर्ट ने माना कि सुरजीत सिंह होमगार्ड के तौर पर कार्यरत थे और उनकी आय से जुड़े दस्तावेज रिकॉर्ड पर मौजूद हैं। कोर्ट ने उनकी कमाई, परिवार की उन पर निर्भरता, इलाज पर हुए खर्च और कानून में तय मानकों को ध्यान में रखते हुए कुल मुआवजा तय किया। इस मुआवजे में परिवार की रोज़ी-रोटी का नुकसान, आगे चलकर होने वाली कमाई का नुकसान, अंतिम संस्कार पर हुआ खर्च, घर-गृहस्थी के नुकसान की भरपाई और पत्नी व माता-पिता को मिलने वाली पारिवारिक सहायता राशि शामिल है।
चंडीगढ़ जिला अदालत। फाइल फोटो।
जानिए, कोर्ट ने आदेश में क्या कहा
कोर्ट ने इलाज के दौरान हुए मेडिकल खर्च को भी मुआवजे में शामिल माना है। कोर्ट ने साफ कहा कि पीड़ित परिवार ने इलाज पर जो खर्च किया, उसकी भरपाई मिलनी चाहिए।
बीमा कंपनी को भुगतान का आदेश देते हुए कोर्ट ने माना कि हादसे के समय ट्रैक्टर का बीमा वैध था। इस कारण आईएफएफसीओ टोकियो जनरल इंश्योरेंस कंपनी को पहले पूरी मुआवजा राशि पीड़ित परिवार को अदा करनी चाहिए। हालांकि, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि बीमा कंपनी बाद में यह रकम ट्रैक्टर ड्राइवर और वाहन मालिक से वसूल सकती है।
मुआवजे के बंटवारे को लेकर कोर्ट ने निर्देश दिया है कि पत्नी को 13.09 लाख रुपए दिए जाएंगे। वहीं मृतक की मां को 7 लाख रुपए और पिता को 5 लाख रुपए मुआवजे के रूप में मिलेंगे। अदालत का कहना है कि यह बंटवारा परिवार के सदस्यों की निर्भरता को ध्यान में रखकर किया गया है।
Discover more from India News
Subscribe to get the latest posts sent to your email.