हिसार कैंट क्षेत्र के रहने वाले 69 वर्षीय रिटायर्ड सूबेदार करण सिंह से 15,16,338 रुपये की साइबर ठगी की गई। आरोपियों ने खुद को बीमा कंपनी का कर्मचारी बताकर पॉलिसी की बकाया राशि ब्याज सहित लौटाने का झांसा दिया। इस संबंध में साइबर थाना पुलिस ने शिकायत दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। एफआईआर के मुताबिक, शिकायतकर्ता ने वर्ष 2010 में मैक्स न्यूयॉर्क लाइफ इंश्योरेंस की 8 लाख रुपए की पॉलिसी ली थी, जो 2020 में पूरी हुई। उन्हें उम्मीद से कम रकम मिली थी। इसी बात का फायदा उठाते हुए 22 सितंबर 2025 को एक महिला ने खुद को सीमा बताकर फोन किया और कहा कि उनकी पॉलिसी का बाकी पैसा कंपनी में जमा है, जो वापस मिल सकता है। इसके बाद राजीव शर्मा नामक व्यक्ति ने खुद को कंपनी एजेंट बताकर संपर्क किया और कहा कि पॉलिसी की कुल 13,28,000 रुपये की राशि ब्याज सहित बनती है, लेकिन इसके लिए पहले रजिस्ट्रेशन फीस जमा करनी होगी। किस तरह और कितनी रकम ठगी गई
आरोपियों ने अलग-अलग तरह से विभिन्न बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर करवाए। सबसे पहले 17 अक्टूबर 2025 को ₹17,928 रजिस्ट्रेशन फीस के लिए रुपए लिए। इसके बाद 31 अक्टूबर 2025 को कोड जनरेट शुल्क के लिए ₹44,980, 7 नवंबर 2025 को एडिशनल अमाउंट रिलीज शुल्क के ₹87,884, 21 नवंबर 2025 को ₹1,52,400, 28 नवंबर 2025 को ₹92,017, 2 दिसंबर 2025 को ₹92,017, 10 दिसंबर 2025 को ₹1,66,826, 26 दिसंबर 2025 को ₹2,35,339, 9 जनवरी 2026 को ₹2,00,000, 12 जनवरी 2026 को ₹2,70,000 और 15 जनवरी को ₹1,56,943 की राशि खातों में डलवा ली। इस प्रकार कुल 15,16,338 रुपये आरोपियों ने अलग-अलग बहानों जैसे ऑडिट चार्ज, कोड, सरकारी शुल्क, अतिरिक्त लाभ आदि के नाम पर वसूल लिए। जीवन बीमा सुधार केंद्र के नाम पर नया झांसा
जब पीड़ित को शक हुआ तो आरोपियों ने नया पैंतरा अपनाया। संगीता और चिंतामणि नाम से फोन कर खुद को जीवन बीमा सुधार केंद्र, हैदराबाद का अधिकारी बताया। उन्होंने दावा किया कि एजेंट ने गलत कागजात बना लिए हैं और पूरी राशि करीब 18.40 लाख रुपये वापस दिलाई जाएगी, लेकिन पहले और शुल्क देना होगा। शिकायतकर्ता ने अपनी जमा पूंजी, पेंशन पर लिए गए 3.30 लाख रुपए के पर्सनल लोन और पड़ोसियों से उधार लेकर रकम जमा कराई। इसके बावजूद न तो पॉलिसी का पैसा मिला और न ही जमा कराई गई राशि वापस हुई। उल्टा आरोपी और 5 लाख रुपये की मांग करने लगे। ऐसे खुली ठगी की पोल
जब पीड़ित ने अपने छोटे बेटे को पूरी बात बताई तो उसे साइबर ठगी का शक हुआ। इसके बाद राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल (NCCRP) पर शिकायत दर्ज कराई गई। प्रारंभिक जांच में धोखाधड़ी की पुष्टि होने पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं 318(4), 319 और 61 के तहत मामला दर्ज कर जांच एसआई नरेंद्र कुमार को सौंपी गई है।
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