हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के 7 जनवरी को पारित उस फैसले पर अंतरिम रोक लगा दी है, जिसके तहत राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के कार्यालय को शिमला से धर्मशाला स्थानांतरित किया गया है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश जिया लाल भारद्वाज की खंडपीठ ने इस संबंध में प्रतिवादी राज्य सरकार और अन्य को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। मामले की अगली सुनवाई 8 अप्रैल को होगी। तब तक आयोग का कार्यालय शिमला से धर्मशाला स्थानांतरित नहीं किया जाएगा।
जनहित याचिका में बताया कि सरकार ने आयोग के ढांचे और स्थान परिवर्तन का निर्णय कम समय में लिया है। आयोग के अध्यक्ष की नियुक्ति 3 दिसंबर 2025 को हुई। इसके बाद 23 दिसंबर को अन्य सदस्यों की नियुक्ति की गई। नियुक्तियों के ठीक अगले दिन, यानी 24 दिसंबर को कार्यालय स्थानांतरित करने का प्रस्ताव आ गया। प्रस्ताव में यह भी कहा गया कि मुख्य कार्यालय धर्मशाला शिफ्ट होगा, जबकि शिमला स्थित वर्तमान कार्यालय को कैंप ऑफिस के रूप में रखा जाएगा।
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि इस स्थानांतरण से प्रशासनिक जटिलताएं बढ़ेंगी। वर्तमान में आयोग में कुल 11 पद भरे हुए हैं। इनमें से 6 कर्मचारी चतुर्थ श्रेणी के हैं। याचिका में तर्क दिया गया है कि इतने कम स्टाफ वाले कार्यालय को शिफ्ट करने से न तो शिमला में भीड़ कम होगी और न प्रशासनिक लाभ होगा। याचिकाकर्ता ने बताया कि चयन आयोग का वर्तमान कार्यालय 99 वर्ष की लीज पर है, जिसके लिए 22.54 लाख रुपये एकमुश्त दिए गए हैं। अभी तक यह भी स्पष्ट नहीं है कि धर्मशाला में आयोग के लिए कौन सा और कैसा स्थान उपलब्ध कराया जाएगा।
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