पुराने समय में राजा-महाराजाओं की तर्ज पर स्कूलों में अब बच्चों को चखनू की सुविधा मिलेगी। इसमें माताएं मिड-डे मील का स्वाद बच्चों को परोसने के आधा घंटा पहले चखेंगी। स्वाद बेहतर और खाना पौष्टिक होने पर ही बच्चों को यह वितरित किया जाएगा। इसको लेकर शिक्षा विभाग ने स्कूलों को आदेश जारी कर दिए हैं। इसमें केंद्र सरकार की भोजन पारखी योजना के तहत महिलाओं की एक कमेटी बनाई जाएगी।
इस कमेटी से रोजाना एक या दो महिलाएं स्कूल में जाकर दोपहर का भोजन चखेंगी। इसका रिकॉर्ड रखने के लिए स्कूल एमडीएम प्रभारी को एक रजिस्टर भी लगाना होगा, जिसमें महिलाएं हस्ताक्षर करेंगी। प्रदेशभर में प्री नर्सरी से आठवीं कक्षा तक के करीब 5.64 लाख बच्चों को दोपहर का भोजन दिया जा रहा है।
पहले जैसा भी खाना बनाया जाता था, उसे सीधे बच्चों को बांट दिया जाता था। इसकी वजह से बच्चों को कई बार खराब खाना मिल जाता था। लेकिन अब इस नए निर्देश के बाद महिलाओं की एक कमेटी बनानी होगी, जो चखनू के तौर पर बच्चों को खाना वितरित करने से आधा घंटे पहले स्वाद के अलावा खाने की क्वालिटी भी चेक करेगी। अगर खाने में कोई भी कमी होगी, तो उसे बच्चों को नहीं परोसा जाएगा। अनुमति मिलने के बाद ही खाना बच्चों के बीच बांटा जाएगा।
हालांकि इससे पहले भी स्कूलों में खाना चखने के लिए अभिभावकों को बुलाने के निर्देश दिए गए थे, मगर उसमें एक तो महिलाएं नहीं थीं, दूसरा वह पूरी तरह से लागू भी नहीं किया गया था। उसमें शिक्षक ही खाना चखते थे, मगर अब महिलाओं को बुलाना अनिवार्य होगा।
सभी स्कूलों को जारी आदेशों के तहत खाना वितरण करने के निर्देश दिए गए हैं। इसमें कब और किस दिन कमेटी के किस सदस्य ने खाने का स्वाद चखा, इसका भी रिकॉर्ड रखना होगा। इसमें हस्ताक्षर होने भी जरूरी हैं। यह प्रक्रिया नहीं अपनाने वाले स्कूल प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई का भी प्रावधान है। -राज कुमार पराशर, एमडीएम के जिला नोडल अधिकारी
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