हिमाचल प्रदेश में अब कर्मचारियों-अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति सेवा मूल तैनाती की अवधि में नहीं गिनी जाएगी। सरकार ने प्रतिनियुक्ति से जुड़े मामलों में प्रशासनिक सख्ती लागू कर दी है। मुख्य सचिव संजय गुप्ता ने प्रतिनियुक्ति की पूरी अवधि, स्थान और समय को सेवा पुस्तिका में दर्ज करना अनिवार्य कर दिया है। ऐसा न करने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
मंगलवार को कार्मिक विभाग की ओर से सभी प्रशासनिक सचिवों, विभागाध्यक्षों, मंडलायुक्तों, उपायुक्तों, बोर्ड-निगमों, सरकारी विश्वविद्यालयों और स्वायत्त संस्थाओं को निर्देश जारी किए गए हैं। यह निर्देश हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट द्वारा विपिन कुमार गुलेरिया बनाम राज्य सरकार केस में 26 नवंबर 2025 को पारित आदेशों के अनुपालन में जारी किए गए हैं।
सरकार ने माना है कि प्रशासनिक आवश्यकताओं के चलते कई अधिकारियों-कर्मचारियों को विभाग के भीतर या बाहर प्रतिनियुक्त किया जाता है, लेकिन उनकी सेवा पुस्तिका में यह अवधि दर्ज नहीं की जाती। परिणामस्वरूप सेवा पुस्तिका में उन्हें लगातार मूल स्टेशन पर तैनात दर्शाया जाता है और प्रतिनियुक्ति अवधि को भी मूल तैनाती की अवधि मान लिया जाता है। सरकारी समीक्षा में यह भी सामने आया है कि कठिन, दुर्गम, जनजातीय और ग्रामीण क्षेत्रों में तैनाती का लाभ उन अधिकारियों को भी मिलता रहा है, जिन्हें बाद में अन्य स्थानों पर प्रतिनियुक्त कर दिया गया था।
सेवा पुस्तिका में प्रविष्टि न होने के कारण ऐसे अधिकारी भविष्य के स्थानांतरण में अनुचित लाभ प्राप्त कर रहे थे, जो राज्य की स्थानांतरण नीति के विपरीत है। मंगलवार को जारी निर्देशों के अनुसार प्रतिनियुक्ति की अवधि को मूल पदस्थापन से अलग माना जाएगा और इसे स्थानांतरण, तैनाती अवधि तथा पोस्टिंग से जुड़े सभी लाभों के निर्धारण में स्वतंत्र रूप से गिना जाएगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि इन निर्देशों का उल्लंघन करने वाले अधिकारियों या कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
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