पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने 83 वर्षीय बुजुर्ग विधवा बड़का देवी को 33 साल बाद फैमिली पेंशन का अधिकार दिलाते हुए अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने साफ कहा कि पेंशन न देना ‘निरंतर गलत’ (Continuing Wrong) की श्रेणी में आता है और हर महीने नया कारण पैदा होता है, इसलिए केवल देरी के आधार पर दावा खारिज नहीं किया जा सकता। ये मामला पंजाब के लुधियाना का है। यह फैसला जस्टिस हरप्रीत सिंह ने CWP-32455-2025 में सुनाया। याचिकाकर्ता बडका देवी के पति राम दास, लुधियाना इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट में माली के पद पर कार्यरत थे और 20 जुलाई 1991 को सेवा में रहते हुए उनका निधन हो गया था। इसके बाद भी बडका देवी को अब तक फैमिली पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति लाभ नहीं मिले थे। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में बालकृष्ण एस.पी. वाघमारे, एम.आर. गुप्ता, शिव दास, तरसेम सिंह, रुशिभाई जगदीशचंद्र पाठक और हालिया फैसला उत्तर प्रदेश राज्य बनाम दिनेश कुमार शर्मा (2025) का हवाला दिया। 3 साल का एरियर 6% ब्याज सहित बुजुर्ग विधवा बड़का देवी की वकील गीतांजली छाबड़ा ने बताया कि हाईकोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिए कि याचिका दायर करने से पहले के तीन साल का फैमिली पेंशन एरियर 6 प्रतिशत ब्याज सहित दिया जाए। इसके साथ ही चार सप्ताह के भीतर नियमित मासिक फैमिली पेंशन शुरू की जाए। कोर्ट ने एलटीसी और मेडिकल अलाउंस जैसे अन्य पात्र लाभ भी देने के आदेश दिए हैं। नहीं मानी सरकार की एक भी दलील राज्य सरकार की ओर से दलील दी गई कि याचिकाकर्ता ने 1991 से 31 साल तक पेंशन के लिए आवेदन नहीं किया और अंशदायी पेंशन फंड जमा नहीं कराया, इसलिए मामला देरी और लापरवाही से ग्रस्त है। हालांकि सरकार ने यह भी स्वीकार किया कि 23 दिसंबर 2025 को फैमिली पेंशन स्वीकृत करने के निर्देश जारी किए जा चुके हैं। हाईकोर्ट ने सरकार की देरी वाली दलील को अस्थिर करार देते हुए खारिज कर दिया। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के कई अहम फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि पेंशन कोई अनुग्रह या दया नहीं, बल्कि अधिकार है। पेंशन का दावा हर महीने बनता है और न मिलने पर हर माह नया कारण पैदा होता है।ऐसे मामलों में देरी का नियम लागू नहीं होता, लेकिन पिछले बकाया (एरियर) का भुगतान आमतौर पर सिर्फ 3 साल तक ही दिया जाता है।
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