Ayurvedic remedies for cold : सूखी ठंडी का पहला असर त्वचा पर पड़ता है. इसकी चपेट में आते ही त्वचा का रूखापन, खुजली और फटने की समस्या आम हो जाती है. ठंड के मौसम में पाचन तंत्र भी कमजोर पड़ सकता है. कब्ज, गैस और अपच जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं. सुबह खाली पेट गुनगुना पानी पीने से शरीर के विषैले तत्व बाहर निकलते हैं. नाक बंद रहना, गले में खराश और बार-बार सर्दी होना आम समस्या है. इनसे भी बचाव जरूरी है. लोकल 18 ने इस बारे में ऋषिकेश के आयुष चिकित्सक डॉ. राजकुमार से बात की.
ये नुस्खे आएंगे काम
ठंड के मौसम में पाचन तंत्र भी कमजोर पड़ सकता है. सूखी ठंडी में कब्ज, गैस और अपच जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं. आयुर्वेद सलाह देता है कि इस मौसम में गुनगुना पानी पिया जाए. ठंडा पानी पीने से बचना चाहिए क्योंकि यह पाचन अग्नि को कमजोर करता है. सुबह खाली पेट गुनगुना पानी पीने से शरीर के विषैले तत्व बाहर निकलते हैं और पाचन सही रहता है. सूखी ठंडी में श्वसन तंत्र जल्दी प्रभावित होता है. नाक बंद रहना, गले में खराश और बार-बार सर्दी होना आम समस्या है. ऐसे में तुलसी, अदरक और दालचीनी से बनी हर्बल चाय बहुत लाभकारी होती है. यह चाय शरीर को अंदर से गर्म रखती है और इम्युनिटी बढ़ाने में मदद करती है. आयुर्वेद के अनुसार, रोजाना एक से दो कप यह काढ़ा पीने से सर्दी-जुकाम का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है.
गिलोय भी रामबाण
डॉ. राजकुमार के मुताबिक, आंवला आयुर्वेद का एक प्रमुख सुपरफूड माना जाता है. इसमें भरपूर मात्रा में विटामिन सी पाया जाता है, जो रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करता है. ठंड के मौसम में आंवले का मुरब्बा, चूर्ण या जूस किसी भी रूप में सेवन किया जा सकता है. शहद का सेवन भी बेहद फायदेमंद होता है. शहद शरीर को ऊर्जा देता है और सूखी खांसी में राहत पहुंचाता है. गिलोय को आयुर्वेद में अमृत के समान माना गया है. यह शरीर को अंदर से मजबूत बनाता है और संक्रमण से लड़ने की क्षमता बढ़ाता है. गिलोय का काढ़ा या टैबलेट के रूप में सेवन करने से बार-बार बीमार पड़ने की समस्या कम होती है. सूखी ठंडी में यह औषधि विशेष रूप से लाभकारी मानी जाती है.
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Priyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu…और पढ़ें
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