महिलाओं को ज्यादा हो रही परेशानी, डॉक्टर की सलाह
वहीं इस बारे में अंबाला छावनी सिविल अस्पताल के आयुर्वेदाचार्य डॉ. जितेंद्र ने बताया कि चिलब्लेन्स में सबसे पहले उंगलियों में जलन, खुजली और हल्का दर्द शुरू होता है. इसके बाद सूजन आ जाती है और कई मामलों में गांठ बन जाती है. उन्होंने कहा कि ज्यादा ठंड में रहने या बार-बार ठंडे पानी के संपर्क में आने से यह परेशानी बढ़ जाती है.
उन्होंने बताया कि यह बीमारी पुरुषों की तुलना में महिलाओं में अधिक पाई जाती है, इसकी बड़ी वजह सर्दियों में घरेलू कामों के दौरान ठंडे पानी का ज्यादा इस्तेमाल करना हैं, क्योंकि लंबे समय तक पानी में काम करने से त्वचा की रक्त नलिकाएं प्रभावित होती हैं, जिससे चिलब्लेन्स का खतरा बढ़ जाता है. उन्होंने बताया कि पिछले कुछ दिनों से यह समस्या काफी ज्यादा बढ़ गई है क्योंकि धूप नहीं निकली है ओर जैसे-जैसे सर्दी बढ़ रही है वैसे-वैसे मरीजों की संख्या में इजाफा हो रहा हैं.
क्या है उपचार
उन्होंने बताया बताया कि वैसे तो आयुर्वेद में इस समस्या के बहुत से उपचार बताए गए हैं, लेकिन इसमें खासतौर पर एक घरेलू नुस्खा काफी फायदेमंद है. इसमें सबसे पहले रात के समय चाय पत्ती को पानी में डालकर उबाल लेना है उसके बाद उसे चेक कर लें कि वह ज्यादा गर्म ना हो. फिर उस गर्म चाय पत्ती वाले पानी में अपने पैरों और हाथ की उंगलियों को डुबोकर कुछ देर तक रख लेना है, जिसके बाद उसे अच्छे ड्राई यानी सॉफ्ट कपड़े से साफ कर ले. फिर कुछ देर बाद सरसों या फिर नारियल के तेल को सुजान वाली जगह पर लगा लेना है.
उन्होंने कहा कि अगर उक्त बीमारी से काफी परेशानी हो रही है तो इसे ठीक करने के लिए हाथों व पैरों को गर्म रखें, लेकिन मालिश व रगड़ का प्रयोग न करें, क्योंकि इससे त्वचा में जलन बढ़ सकती है और जितना संभव हो सके ठंड के संपर्क में आने से बचें व हाथों में गर्म पानी वस्त्र पहन कर रखें. उन्होंने बताया कि यदि हाथों या फिर सूजन वाली जगह पर खुजली हो रही है, तो लोशन इत्यादि का प्रयोग कर सकते है, लेकिन ज्यादा परेशानी होने पर डॉक्टर से संपर्क करें.
पुनर्नवादि मंडूर, हल्दी और अलसी है फायदेमंद
उन्होंने कहा कि इसके साथ ही ठंड में अगर आपके हाथ पैरों की नसों में रक्त संचार सही ढंग से नहीं चल रहा है या फिर सूजन की ज्यादा समस्या हो रही है, तो आयुर्वेद में पुनर्नवादि मंडूर एक प्रसिद्ध आयुर्वेदिक दवा बताया गई है, जो एनीमिया (खून की कमी), सूजन (एडिमा), लिवर और प्लीहा (Spleen) के रोगों के इलाज के लिए इस्तेमाल होती है, यह पुनर्नवा और मंडूर भस्म (आयरन ऑक्साइड) जैसे जड़ी-बूटियों से बनती है और शरीर से अतिरिक्त पानी निकालने व रक्त की गुणवत्ता सुधारने में मदद करती है.
उन्होंने बताया कि घरेलू नुस्खे के लिए आयुर्वेद में हल्दी, सॉफ सौंठ और धनिया का इस्तेमाल आप रोजाना अपने खान-पान में कर सकते हैं. इसके साथ ही कुछ समय हाथ पैरों की एक्सरसाइज जरूर करें. उन्होंने कहा कि सर्दी में अलसी का प्रयोग जरूर करें, क्योंकि वह हमारे शरीर में एक ऊर्जा भरने का काम करती है.
Discover more from India News
Subscribe to get the latest posts sent to your email.